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Chaar Natak

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“मराठी की रंगपरम्परा बहुत समृद्ध और सजीव रही है और उसका प्रभाव हिन्दी पर भी पड़ा है। मराठी और हिन्दी के बीच रंगमंच और नाटक के क्षेत्र में लगातार आदान-प्रदान होता रहा है। मराठी के प्राय: सभी बड़े आधुनिक नाटककारों के नाटक हिन्दी में अनूदित हुए और अनेक निर्देशकों द्वारा... Read More

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Description

“मराठी की रंगपरम्परा बहुत समृद्ध और सजीव रही है और उसका प्रभाव हिन्दी पर भी पड़ा है। मराठी और हिन्दी के बीच रंगमंच और नाटक के क्षेत्र में लगातार आदान-प्रदान होता रहा है। मराठी के प्राय: सभी बड़े आधुनिक नाटककारों के नाटक हिन्दी में अनूदित हुए और अनेक निर्देशकों द्वारा कई शहरों में खेले जाते रहे हैं। श्याम मनोहर के ‘चार नाटक’ मराठी-हिन्दी के विद्वान् निशिकान्त ठकार द्वारा अनूदित होकर यहाँ पहली बार हिन्दी में प्रकाशित हो रहे हैं। रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत अन्य भारतीय भाषाओं से अच्छी और प्रासंगिक सामग्री हिन्दी में लाने के हमारे प्रयत्न का यह हिस्सा है।” “marathi ki rangaprampra bahut samriddh aur sajiv rahi hai aur uska prbhav hindi par bhi pada hai. Marathi aur hindi ke bich rangmanch aur natak ke kshetr mein lagatar aadan-prdan hota raha hai. Marathi ke pray: sabhi bade aadhunik natakkaron ke natak hindi mein anudit hue aur anek nirdeshkon dvara kai shahron mein khele jate rahe hain. Shyam manohar ke ‘char natak’ marathi-hindi ke vidvan nishikant thakar dvara anudit hokar yahan pahli baar hindi mein prkashit ho rahe hain. Raza pustak mala ke antargat anya bhartiy bhashaon se achchhi aur prasangik samagri hindi mein lane ke hamare pryatn ka ye hissa hai. ”