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Chaak

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‘चाक’ सामन्ती समाज के भीतर व्याप्त हिंसा और स्वार्थों की टकराहट की प्रामाणिक कहानी है। इस समाज का ताना-बाना हिंसा और सेक्स से बना है। मैत्रेयी इन दोनों को ही एक कथाकार की निगाह से पात्रों के आचार-विचार और सोच के रूप में प्रभावशाली ढंग से पकड़ती हैं। ‘चाक’ में... Read More

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Description

‘चाक’ सामन्ती समाज के भीतर व्याप्त हिंसा और स्वार्थों की टकराहट की प्रामाणिक कहानी है। इस समाज का ताना-बाना हिंसा और सेक्स से बना है। मैत्रेयी इन दोनों को ही एक कथाकार की निगाह से पात्रों के आचार-विचार और सोच के रूप में प्रभावशाली ढंग से पकड़ती हैं। ‘चाक’ में बिना बड़बोलेपन के उन्होंने गाँव की स्त्री की जिस चेतना का विकास किया है, वह उपन्यास-कला पर उनकी पकड़ को रेखांकित करता है।
— राजेन्द्र यादव
जिस लोकजीवन से हमारी रचनात्मक धारा काफ़ी पहले विमुख हो चुकी थी, उसकी अनेक परतें मैत्रेयी पुष्पा ने खोल दी हैं। मैत्रेयी पुष्पा को उनकी मामूली लेकिन ज़बरदस्त स्त्रियों के कारण याद किया जाएगा।
— ज्ञानरंजन
मैत्रेयी में मानवीय भावों की सघन अन्तरंगता और सम्बन्धों की जटिलता को चित्रित करने की अनोखी क्षमता मौजूद है।
— परमानन्द श्रीवास्तव
स्त्री की कथादृष्टि ही नहीं, उसकी शैली और वाक्य-रचना भी पुरुष से भिन्न होती है। इसका प्रमाण ‘चाक’ की कथा-संरचना और कथा-भाषा में दिखाई देता है। ‘चाक’ की कथा एक स्तर पर गद्य में चलती है और इसके साथ दूसरे स्तर पर लोकगीतों में।
— मैनेजर पाण्डेय। ‘chak’ samanti samaj ke bhitar vyapt hinsa aur svarthon ki takrahat ki pramanik kahani hai. Is samaj ka tana-bana hinsa aur seks se bana hai. Maitreyi in donon ko hi ek kathakar ki nigah se patron ke aachar-vichar aur soch ke rup mein prbhavshali dhang se pakadti hain. ‘chak’ mein bina badbolepan ke unhonne ganv ki stri ki jis chetna ka vikas kiya hai, vah upanyas-kala par unki pakad ko rekhankit karta hai. — rajendr yadav
Jis lokjivan se hamari rachnatmak dhara kafi pahle vimukh ho chuki thi, uski anek parten maitreyi pushpa ne khol di hain. Maitreyi pushpa ko unki mamuli lekin zabardast striyon ke karan yaad kiya jayega.
— gyanranjan
Maitreyi mein manviy bhavon ki saghan antrangta aur sambandhon ki jatilta ko chitrit karne ki anokhi kshamta maujud hai.
— parmanand shrivastav
Stri ki kathadrishti hi nahin, uski shaili aur vakya-rachna bhi purush se bhinn hoti hai. Iska prman ‘chak’ ki katha-sanrachna aur katha-bhasha mein dikhai deta hai. ‘chak’ ki katha ek star par gadya mein chalti hai aur iske saath dusre star par lokgiton mein.
— mainejar pandey.