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Bin Pani Sab Soon

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अनुपम मिश्र हमारे समय के उन बिरले सोचने-समझनेवाले चौकन्ने लोगों में से थे जिन्होंने लगातार हमें पानी के संकट की याद दिलाई, चेतावनी दी, पानी के सामुदायिक संचयन की भारतीय प्रणालियों से हमारा परिचय कराया। उनका इसरार था कि हम लोकबुद्धि से भी सीखें। उनकी असमय मृत्यु के बाद जो... Read More

Description

अनुपम मिश्र हमारे समय के उन बिरले सोचने-समझनेवाले चौकन्ने लोगों में से थे जिन्होंने लगातार हमें पानी के संकट की याद दिलाई, चेतावनी दी, पानी के सामुदायिक संचयन की भारतीय प्रणालियों से हमारा परिचय कराया। उनका इसरार था कि हम लोकबुद्धि से भी सीखें। उनकी असमय मृत्यु के बाद जो सामग्री मिली है उसमें से यह संचयन किया गया है। वह हिन्दी में बची ज़मीनी सोच और लोकचिन्ताओं से एक बार फिर हमें अवगत कराता है। वह इसका साक्ष्य भी है कि साफ़-सुथरा गद्य साफ़-सुथरे माथे से ही लिखा जा सकता है।”
—अशोक वाजपेयी Anupam mishr hamare samay ke un birle sochne-samajhnevale chaukanne logon mein se the jinhonne lagatar hamein pani ke sankat ki yaad dilai, chetavni di, pani ke samudayik sanchyan ki bhartiy prnaliyon se hamara parichay karaya. Unka israr tha ki hum lokbuddhi se bhi sikhen. Unki asmay mrityu ke baad jo samagri mili hai usmen se ye sanchyan kiya gaya hai. Vah hindi mein bachi zamini soch aur lokchintaon se ek baar phir hamein avgat karata hai. Vah iska sakshya bhi hai ki saf-suthra gadya saf-suthre mathe se hi likha ja sakta hai. ”—ashok vajpeyi