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Bihar Ek Etihasik Adhyayan

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बिहार में ऐतिहासिक गतिविधियों की शुरुआत उत्तरवैदिक काल से होती है। इस इलाक़े में ई.पू. छठी शताब्दी के दौरान विकास की गति तेज़ हो गई। प्रारम्भ में इसे मगध के नाम से जाना गया। राजगृह और गया का इलाक़ा प्रारम्भ में तथा मौर्यकाल के दौरान गंगा नदी के उत्तर और... Read More

Description

बिहार में ऐतिहासिक गतिविधियों की शुरुआत उत्तरवैदिक काल से होती है। इस इलाक़े में ई.पू. छठी शताब्दी के दौरान विकास की गति तेज़ हो गई। प्रारम्भ में इसे मगध के नाम से जाना गया। राजगृह और गया का इलाक़ा प्रारम्भ में तथा मौर्यकाल के दौरान गंगा नदी के उत्तर और दक्षिण का इलाक़ा ज़्यादा महत्त्वपूर्ण हो गया। पाटलिपुत्र विश्व के प्रमुख नगरों में से एक हो गया। शुंग और कुषाण राजवंश के बाद सम्पूर्ण आधुनिक बिहार के इलाक़े पर किसी एक राजवंश का प्रशासनिक नियंत्रण नहीं रहा।
पूर्व मध्यकाल में आधुनिक बंगाल और उत्तर प्रदेश के शासकों ने बिहार को खंडित कर दिया। यह सिलसिला बाद के सैकड़ों वर्षों तक चलता रहा। मराठों का आधिपत्य भी इसके कुछ हिस्से पर स्थापित रहा।
शेरशाह और अकबर के ज़माने में बिहार का पुनः एक राजनीतिक नक़्शा तैयार हुआ।
अंग्रेज़ीकाल में बिहार का अस्तित्व बंगाल के उपनिवेश के समान 1912 ई. और उसके बाद तक बना रहा।
मौर्यकाल के बाद बिहार की आर्थिक स्थिति अफ़ग़ानों और मुग़लशासकों के काल में बेहतर हुई। बिहार के कई छोटे-छोटे क़स्बे आर्थिक बेहतरी और उद्योग के केन्द्र रहे। अंग्रेज़ीकाल में चीनी मिलें बिहार के क़रीब 30 स्थानों में स्थापित हुईं। बिहार में नदियों की भूमिका काफ़ी अनुकूल रही। तिरहुत की ज़मीन भारतवर्ष में सर्वाधिक उपजाऊ थी। भारतवर्ष में सबसे ज़्यादा पेय जल-सुविधा आज भी यहीं है। Bihar mein aitihasik gatividhiyon ki shuruat uttaravaidik kaal se hoti hai. Is ilaqe mein ii. Pu. Chhathi shatabdi ke dauran vikas ki gati tez ho gai. Prarambh mein ise magadh ke naam se jana gaya. Rajgrih aur gaya ka ilaqa prarambh mein tatha maurykal ke dauran ganga nadi ke uttar aur dakshin ka ilaqa zyada mahattvpurn ho gaya. Pataliputr vishv ke prmukh nagron mein se ek ho gaya. Shung aur kushan rajvansh ke baad sampurn aadhunik bihar ke ilaqe par kisi ek rajvansh ka prshasnik niyantran nahin raha. Purv madhykal mein aadhunik bangal aur uttar prdesh ke shaskon ne bihar ko khandit kar diya. Ye silasila baad ke saikdon varshon tak chalta raha. Marathon ka aadhipatya bhi iske kuchh hisse par sthapit raha.
Shershah aur akbar ke zamane mein bihar ka punः ek rajnitik naqsha taiyar hua.
Angrezikal mein bihar ka astitv bangal ke upanivesh ke saman 1912 ii. Aur uske baad tak bana raha.
Maurykal ke baad bihar ki aarthik sthiti afganon aur mugalshaskon ke kaal mein behtar hui. Bihar ke kai chhote-chhote qasbe aarthik behatri aur udyog ke kendr rahe. Angrezikal mein chini milen bihar ke qarib 30 sthanon mein sthapit huin. Bihar mein nadiyon ki bhumika kafi anukul rahi. Tirhut ki zamin bharatvarsh mein sarvadhik upjau thi. Bharatvarsh mein sabse zyada pey jal-suvidha aaj bhi yahin hai.

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