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Bhool Pata Nahin : Mere Chuninda Geet

Dr. Ramesh Pokhariyal \'Nishank\'

Rs. 999

इस संग्रह में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक' के अनेक प्रकाशित काव्य संग्रहों के चुनिन्दा गीत समाहित किये गये हैं। साथ ही कुछ गीत ऐसे भी हैं जो प्रकाशित नहीं हुए हैं। आज मनुष्य के जीवन में आनन्द सूखता सा जा रहा है। ‘निशंक' के इन गीतों में जहाँ समाज की... Read More

Description

इस संग्रह में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक' के अनेक प्रकाशित काव्य संग्रहों के चुनिन्दा गीत समाहित किये गये हैं। साथ ही कुछ गीत ऐसे भी हैं जो प्रकाशित नहीं हुए हैं। आज मनुष्य के जीवन में आनन्द सूखता सा जा रहा है। ‘निशंक' के इन गीतों में जहाँ समाज की विसंगतियाँ, उसकी जटिलताएँ तथा उनकी विषमताओं से उपजी कुण्ठा रूपायित हुई है तो वहीं दूसरी ओर मनुष्य की एकान्तिकता और उसे आनन्द देने वाले सुकोमल क्षणों की रसधारा सी बहती हुई भी प्रतीत होती है। इन गीतों में जन सामान्य की अपेक्षा-आकांक्षा, आशा-निराशा, दुख-दर्द तथा उसके संघर्ष को शब्दों में सँजोकर वाणी प्रदान की गयी है। प्रेरणा, प्रणय और देशभक्ति के इन गीतों की रसधार निश्चित रूप से आपको उद्वेलित, आनन्दित और प्रेरित करेगी। is sangrah mein Dau. ramesh pokhariyal ‘nishank ke anek prkashit kavya sangrhon ke chuninda geet samahit kiye gaye hain. saath hi kuchh geet aise bhi hain jo prkashit nahin hue hain. aaj manushya ke jivan mein anand sukhta sa ja raha hai. ‘nishank ke in giton mein jahan samaj ki visangatiyan, uski jatiltayen tatha unki vishamtaon se upji kuntha rupayit hui hai to vahin dusri or manushya ki ekantikta aur use anand dene vale sukomal kshnon ki rasdhara si bahti hui bhi prteet hoti hai. in giton mein jan samanya ki apeksha akanksha, aasha nirasha, dukh dard tatha uske sangharsh ko shabdon mein sanjokar vani prdaan ki gayi hai. prerna, prnay aur deshbhakti ke in giton ki rasdhar nishchit roop se aapko udvelit, anandit aur prerit karegi.

Additional Information
Book Type

Paperback

Publisher Vani Prakashan
Language Hindi
ISBN 978-9388684101
Pages 204
Publishing Year 2019

Bhool Pata Nahin : Mere Chuninda Geet

इस संग्रह में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक' के अनेक प्रकाशित काव्य संग्रहों के चुनिन्दा गीत समाहित किये गये हैं। साथ ही कुछ गीत ऐसे भी हैं जो प्रकाशित नहीं हुए हैं। आज मनुष्य के जीवन में आनन्द सूखता सा जा रहा है। ‘निशंक' के इन गीतों में जहाँ समाज की विसंगतियाँ, उसकी जटिलताएँ तथा उनकी विषमताओं से उपजी कुण्ठा रूपायित हुई है तो वहीं दूसरी ओर मनुष्य की एकान्तिकता और उसे आनन्द देने वाले सुकोमल क्षणों की रसधारा सी बहती हुई भी प्रतीत होती है। इन गीतों में जन सामान्य की अपेक्षा-आकांक्षा, आशा-निराशा, दुख-दर्द तथा उसके संघर्ष को शब्दों में सँजोकर वाणी प्रदान की गयी है। प्रेरणा, प्रणय और देशभक्ति के इन गीतों की रसधार निश्चित रूप से आपको उद्वेलित, आनन्दित और प्रेरित करेगी। is sangrah mein Dau. ramesh pokhariyal ‘nishank ke anek prkashit kavya sangrhon ke chuninda geet samahit kiye gaye hain. saath hi kuchh geet aise bhi hain jo prkashit nahin hue hain. aaj manushya ke jivan mein anand sukhta sa ja raha hai. ‘nishank ke in giton mein jahan samaj ki visangatiyan, uski jatiltayen tatha unki vishamtaon se upji kuntha rupayit hui hai to vahin dusri or manushya ki ekantikta aur use anand dene vale sukomal kshnon ki rasdhara si bahti hui bhi prteet hoti hai. in giton mein jan samanya ki apeksha akanksha, aasha nirasha, dukh dard tatha uske sangharsh ko shabdon mein sanjokar vani prdaan ki gayi hai. prerna, prnay aur deshbhakti ke in giton ki rasdhar nishchit roop se aapko udvelit, anandit aur prerit karegi.