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Bhavi Vasant-Vibhrat

Hazariprasad Dwivedi

Rs. 100

Vani Prakashan

“वसन्त-विभ्राट् की कल्पना समय से कुछ पहले की गयी है, पर अमूलक नहीं है। कथानक आज से दो सौ वर्ष बाद का है। परिस्थितियों के सूक्ष्म अध्ययन से यह स्पष्ट ही समझ में आ जायेगा कि उन दिनों भारतवर्ष में कई स्वतन्त्र शासन वाले प्रदेश हो जायेंगे। उस समय वर्तमान... Read More

Description

“वसन्त-विभ्राट् की कल्पना समय से कुछ पहले की गयी है, पर अमूलक नहीं है। कथानक आज से दो सौ वर्ष बाद का है। परिस्थितियों के सूक्ष्म अध्ययन से यह स्पष्ट ही समझ में आ जायेगा कि उन दिनों भारतवर्ष में कई स्वतन्त्र शासन वाले प्रदेश हो जायेंगे। उस समय वर्तमान प्रदेशों की सीमा ज्यों की त्यों नहीं रहेगी। अनुमान है कि वर्तमान बनारस कमिश्नरी और बिहार के कुछ ज़िलों के संयोग से ‘काशी’ नामक एक स्वतन्त्र प्रदेश होगा। इसकी राजधानी काशी होगी। साम्यवाद या इसी माप के अन्य वादों का बहुल प्रचार संसार की रोटी-समस्या हल कर देगा। लोगों को इस समस्या से फ़ुरसत मिलने पर अन्य उलझनों के सुलझाने का सामूहिक उद्योग करना होगा। उसी समय ‘सेक्स’ का विवाद उग्र रूप धारण करेगा।“ “vasant vibhrat ki kalpna samay se kuchh pahle ki gayi hai, par amulak nahin hai. kathanak aaj se do sau varsh baad ka hai. paristhitiyon ke sookshm adhyyan se ye spasht hi samajh mein aa jayega ki un dinon bharatvarsh mein kai svtantr shasan vale prdesh ho jayenge. us samay vartman prdeshon ki sima jyon ki tyon nahin rahegi. anuman hai ki vartman banaras kamishnri aur bihar ke kuchh zilon ke sanyog se ‘kashi’ namak ek svtantr prdesh hoga. iski rajdhani kashi hogi. samyvad ya isi maap ke anya vadon ka bahul prchaar sansar ki roti samasya hal kar dega. logon ko is samasya se fursat milne par anya ulajhnon ke suljhane ka samuhik udyog karna hoga. usi samay ‘seks’ ka vivad ugr roop dharan karega. “