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Bhartiya Sahitya Sthapanayen Aur Prastavanayen

Rs. 250 Rs. 223

भारतीय साहित्य भारत के जनगण की ही तरह विविधता और एकता के परस्पर सूत्रों से बुनी हुई एक सघन इकाई है। विभिन्न धाराओं, व्यक्तित्वों और विचार-सरणियों के लोकतांत्रिक अन्तर्गुम्फन से ही वह अस्तित्व में आती है। वरिष्ठ मलयाली कवि और चिन्तक के. सच्चिदानन्दन की यह पुस्तक एक तरफ़ जहाँ इस... Read More

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Description

भारतीय साहित्य भारत के जनगण की ही तरह विविधता और एकता के परस्पर सूत्रों से बुनी हुई एक सघन इकाई है। विभिन्न धाराओं, व्यक्तित्वों और विचार-सरणियों के लोकतांत्रिक अन्तर्गुम्फन से ही वह अस्तित्व में आती है। वरिष्ठ मलयाली कवि और चिन्तक के. सच्चिदानन्दन की यह पुस्तक एक तरफ़ जहाँ इस विविधता के सूत्रों को रेखांकित करती है, वहीं साहित्य और विशेषकर भारतीय साहित्य की वर्तमान स्थिति व उसके सामने उपस्थित चुनौतियों का भी अन्वेषण करती है। मूल रूप से अंग्रेज़ी में ‘इंडियन लिटरेचर : पोजीशंस एंड प्री पोजीशंस’ नाम से प्रकाशित और बहुपठित इस पुस्तक में मिर्ज़ा ग़ालिब, महाश्वेता देवी, ए.के. रामानुजन, वी.एस. खांडेकर, कमलादास, चन्द्रशेखर कंबार, केदारनाथ सिंह, सीताकान्त महापात्र, ओक्‍टावियो पाज़ और पाब्लो नेरुदा जैसे साहित्य-स्तम्भों के साथ-साथ साहित्य की मौजूदा चिन्ताओं और प्रवृत्तियों को चिन्तन का विषय बनाया गया है।
पाठक इस निबन्ध संकलन में उत्तर-आधुनिकता, आधुनिकता, दलित-लेखन, स्त्री-लेखन, भारतीय आख्यान परम्परा, पाठक की नई भूमिका, आधुनिक लेखक की दुविधाएँ तथा कविता का कार्य आदि अनेक समकालीन तथा ज्वलन्त मुद्‌दों पर भी विचारोत्तेजक सामग्री पाएँगे। Bhartiy sahitya bharat ke jangan ki hi tarah vividhta aur ekta ke paraspar sutron se buni hui ek saghan ikai hai. Vibhinn dharaon, vyaktitvon aur vichar-saraniyon ke loktantrik antargumphan se hi vah astitv mein aati hai. Varishth malyali kavi aur chintak ke. Sachchidanandan ki ye pustak ek taraf jahan is vividhta ke sutron ko rekhankit karti hai, vahin sahitya aur visheshkar bhartiy sahitya ki vartman sthiti va uske samne upasthit chunautiyon ka bhi anveshan karti hai. Mul rup se angrezi mein ‘indiyan litrechar : pojishans end pri pojishans’ naam se prkashit aur bahupthit is pustak mein mirza galib, mahashveta devi, e. Ke. Ramanujan, vi. Es. Khandekar, kamladas, chandrshekhar kambar, kedarnath sinh, sitakant mahapatr, ok‍taviyo paaz aur pablo neruda jaise sahitya-stambhon ke sath-sath sahitya ki maujuda chintaon aur prvrittiyon ko chintan ka vishay banaya gaya hai. Pathak is nibandh sanklan mein uttar-adhunikta, aadhunikta, dalit-lekhan, stri-lekhan, bhartiy aakhyan parampra, pathak ki nai bhumika, aadhunik lekhak ki duvidhayen tatha kavita ka karya aadi anek samkalin tatha jvlant mud‌don par bhi vicharottejak samagri payenge.