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Bhartiya Jelon Men Panch Saal

Mary Tyler

Rs. 350 Rs. 312

मेरी इस पुस्तक का उद्देश्य न तो कोई राजनीतिक या सामाजिक शोध प्रस्तुत करना है और न मैं इसे अपना अधिकार या कर्तव्य समझती हूँ कि भारतीय जनता के लिए कोई ऐसे क़ानून अथवा विधि-उल्लेखों द्वारा मार्ग-प्रदर्शन करूँ जिसके आधार पर वे अपने देश की समस्याएँ हल करें। मैं किसी... Read More

Description

मेरी इस पुस्तक का उद्देश्य न तो कोई राजनीतिक या सामाजिक शोध प्रस्तुत करना है और न मैं इसे अपना अधिकार या कर्तव्य समझती हूँ कि भारतीय जनता के लिए कोई ऐसे क़ानून अथवा विधि-उल्लेखों द्वारा मार्ग-प्रदर्शन करूँ जिसके आधार पर वे अपने देश की समस्याएँ हल करें। मैं किसी तरह की विशेषज्ञ होने का दावा नहीं करती और ख़ुद को इस लायक़ नहीं समझती कि भारतीय समाज का गहराई से विश्लेषण प्रस्तुत करूँ। मैंने जो कुछ लिखा है वह आपबीती घटनाओं का ब्योरा है तथा उन लोगों द्वारा बताई गई बातें हैं जिनके साथ भारत में मुझे रहने का तथा जिनसे मिलने का अवसर मिला। यह सोचकर मैं गर्व का अनुभव कर रही हूँ कि राधाकृष्ण प्रकाशन ने मेरी इस पुस्तक को हिन्दी में प्रकाशित करने और इस प्रकार भारत के व्यापकतर जनसमुदाय तक पहुँचाने के योग्य समझा। इस पुस्तक में मैंने जो कुछ लिखा है, वह भारतीय पाठकों को काफ़ी हद तक जाना-पहचाना लगेगा क्योंकि इसमें मैंने महज़ अपने अनुभवों का लेखा-जोखा पेश किया है और वह भी ख़ासतौर से ब्रिटिश पाठकों के लिए जिन्हें भारतीय समाज के वास्तविक स्वरूप की जो भी जानकारी है, वह ना के बराबर है। Meri is pustak ka uddeshya na to koi rajnitik ya samajik shodh prastut karna hai aur na main ise apna adhikar ya kartavya samajhti hun ki bhartiy janta ke liye koi aise qanun athva vidhi-ullekhon dvara marg-prdarshan karun jiske aadhar par ve apne desh ki samasyayen hal karen. Main kisi tarah ki visheshagya hone ka dava nahin karti aur khud ko is layaq nahin samajhti ki bhartiy samaj ka gahrai se vishleshan prastut karun. Mainne jo kuchh likha hai vah aapbiti ghatnaon ka byora hai tatha un logon dvara batai gai baten hain jinke saath bharat mein mujhe rahne ka tatha jinse milne ka avsar mila. Ye sochkar main garv ka anubhav kar rahi hun ki radhakrishn prkashan ne meri is pustak ko hindi mein prkashit karne aur is prkar bharat ke vyapaktar janasamuday tak pahunchane ke yogya samjha. Is pustak mein mainne jo kuchh likha hai, vah bhartiy pathkon ko kafi had tak jana-pahchana lagega kyonki ismen mainne mahaz apne anubhvon ka lekha-jokha pesh kiya hai aur vah bhi khastaur se british pathkon ke liye jinhen bhartiy samaj ke vastvik svrup ki jo bhi jankari hai, vah na ke barabar hai.