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Bhartiya Bhashaon Mein Ramkatha : Odia Bhasha

Chief Editor Dr. Yogendra Pratap Singh, Editor Dr. Ajoy Kumar Patnaik, Visualisation Dr. Yogendra Pratap Singh 

Rs. 395 Rs. 356

Vani Prakashan 

'राम' अथवा राम भावादर्श ओडिशा में किस समय, किसके ज़रिये, किस रूप में या किस तरह आया है-उसके बारे में निर्धारित रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता। पर एक बात तय है कि राम जब भी आये सबसे पहले आम आदमी की जुबाँ पर चढ़कर आये। वे क्रमशः स्थापत्य... Read More

Description

'राम' अथवा राम भावादर्श ओडिशा में किस समय, किसके ज़रिये, किस रूप में या किस तरह आया है-उसके बारे में निर्धारित रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता। पर एक बात तय है कि राम जब भी आये सबसे पहले आम आदमी की जुबाँ पर चढ़कर आये। वे क्रमशः स्थापत्य में आये, फिर चित्रकला और अक्षर कर्म के ज़रिये अभिव्यक्त हुए। कालान्तर में नृत्य, नाटक व प्रदर्शनधर्मी कला में आये और अपनी लोकप्रियता के कारण क्रमशः देश-विदेश में छा गये। 'राम' एवं 'रामकथा' सत्य एवं शाश्वत है। चूँकि यह जन-जीवन से जुड़ी हुई है, हिन्दुस्तान की अस्मिता के प्रतीक राम अब देश की सीमा पार कर विश्व भर में अपनाये जा रहे हैं। लेकिन अपने हीन स्वार्थ साधने के लिए राम के अस्तित्व को नकारने वालों को समझना चाहिए कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम शाश्वत थे, हैं और रहेंगे। ज़रूरत है, हम उनके वास्तविक एवं सात्विक रूप को पहचानें। उनके जीवन-चरित्र से लोक-कल्याणकारी जीवन-दृष्टि एवं मूल्यों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। क्योंकि किसी का भला करना ही असली धर्म है। आज जब विश्व भर में परपीड़न के लिए सन्त्रासवादी सक्रिय हैं, रामकथा और भी अधिक प्रासंगिक हो गयी है। raam athva raam bhavadarsh oDisha mein kis samay, kiske zariye, kis roop mein ya kis tarah aaya hai uske bare mein nirdharit roop se kuchh kaha nahin ja sakta. par ek baat tay hai ki raam jab bhi aaye sabse pahle aam aadmi ki juban par chaDhkar aaye. ve krmashः sthapatya mein aaye, phir chitrakla aur akshar karm ke zariye abhivyakt hue. kalantar mein nritya, natak va prdarshandharmi kala mein aaye aur apni lokapriyta ke karan krmashः desh videsh mein chha gaye. raam evan ramaktha satya evan shashvat hai. chunki ye jan jivan se juDi hui hai, hindustan ki asmita ke prteek raam ab desh ki sima paar kar vishv bhar mein apnaye ja rahe hain. lekin apne heen svaarth sadhne ke liye raam ke astitv ko nakarne valon ko samajhna chahiye ki maryada purushottam raam shashvat the, hain aur rahenge. zarurat hai, hum unke vastvik evan satvik roop ko pahchanen. unke jivan charitr se lok kalyankari jivan drishti evan mulyon ko apne jivan mein utarne ka pryaas karen. kyonki kisi ka bhala karna hi asli dharm hai. aaj jab vishv bhar mein parpiDan ke liye santrasvadi sakriy hain, ramaktha aur bhi adhik prasangik ho gayi hai.