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Barah Baje Raat Ke

Larry Collins and Dominique Lapierre, Tr. Munish Saxena

Rs. 299 Rs. 266

स्वाधीनता-आन्दोलन की चरम परिणति थी आज़ादी लेकिन उससे जुड़ा सदी का कुरूपतम सच—विभाजन। बारह बजे रात के उसी का वृत्तान्त है। यह बड़ी–बड़ी परिघटनाओं वाला इतिहास नहीं बल्कि छोटी-छोटी घटनाओं, मामूली विवरणों, हज़ारों दस्तावेज़ांे और साक्षात्कारों से सजा सूक्ष्म इतिहास है। हालाँकि लैरी कॉलिन्स और डोमीनिक लापियर दोनों विदेशी लेखक... Read More

Description

स्वाधीनता-आन्दोलन की चरम परिणति थी आज़ादी लेकिन उससे जुड़ा सदी का कुरूपतम सच—विभाजन। बारह बजे रात के उसी का वृत्तान्त है। यह बड़ी–बड़ी परिघटनाओं वाला इतिहास नहीं बल्कि छोटी-छोटी घटनाओं, मामूली विवरणों, हज़ारों दस्तावेज़ांे और साक्षात्कारों से सजा सूक्ष्म इतिहास है।
हालाँकि लैरी कॉलिन्स और डोमीनिक लापियर दोनों विदेशी लेखक हैं, फिर भी जिस आत्मीयता और निष्पक्षता से उन्होंने विभाजन के गोपन रहस्यों, षड्यंत्रों, साम्प्रदायिक नंगई और ओछेपन को उजागर किया है, उसकी चतुर्दिक सराहना हुई है। दिलचस्प है कि इसमें कहीं भी ब्रिटिश साम्राज्यवाद का पक्ष नहीं लिया गया है।
विरले ही कोई ग़ैर-साहित्यिक कृति क्लासिक बनती है लेकिन सच्चाई, पठनीयता और निष्पक्षता की बदौलत यह क्लासिक बन गई है। भारतीय उपमहाद्वीप की कई पीढ़ियाँ इसे पढ़ेंगी। Svadhinta-andolan ki charam parinati thi aazadi lekin usse juda sadi ka kuruptam sach—vibhajan. Barah baje raat ke usi ka vrittant hai. Ye badi–badi parighatnaon vala itihas nahin balki chhoti-chhoti ghatnaon, mamuli vivarnon, hazaron dastavezane aur sakshatkaron se saja sukshm itihas hai. Halanki lairi kaulins aur dominik lapiyar donon videshi lekhak hain, phir bhi jis aatmiyta aur nishpakshta se unhonne vibhajan ke gopan rahasyon, shadyantron, samprdayik nangii aur ochhepan ko ujagar kiya hai, uski chaturdik sarahna hui hai. Dilchasp hai ki ismen kahin bhi british samrajyvad ka paksh nahin liya gaya hai.
Virle hi koi gair-sahityik kriti klasik banti hai lekin sachchai, pathniyta aur nishpakshta ki badaulat ye klasik ban gai hai. Bhartiy upamhadvip ki kai pidhiyan ise padhengi.