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Bais Gaz Ki Duniya

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क़दमों से नापें तो जिस पिच पर क्रिकेट खेली जाती है, वह बाईस गज़ की होती है। क्रिकेट को जीवन से जुड़ा खेल भी माना जाता है। जीवन जितना दाँव-पेच या उतार-चढ़ाव से भरा-पूरा होता है उतना ही अस्थिर व रोमांचक खेल क्रिकेट होता है। जिस क्रिकेट को जीवन की... Read More

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Description

क़दमों से नापें तो जिस पिच पर क्रिकेट खेली जाती है, वह बाईस गज़ की होती है। क्रिकेट को जीवन से जुड़ा खेल भी माना जाता है। जीवन जितना दाँव-पेच या उतार-चढ़ाव से भरा-पूरा होता है उतना ही अस्थिर व रोमांचक खेल क्रिकेट होता है। जिस क्रिकेट को जीवन की तरह देखा जाता है, उसी से जीवन को खलने की प्रेरणा भी मिलती है। खेल के संस्मरण भी अपने जीवन को गढ़ते हैं। इसलिए ‘बाईस गज़ की दुनिया’ का यह स्मृति-संग्रह है।
लेखक के अकादमिक सरोकारों के अलावा जो स्मृतियाँ उन्होंने इस पुस्तक में सँजोई हैं, उनसे ही लेखक का संसार बना है। लेखक इन्दौर के एक महाविद्यालय में अंग्रेज़ी भाषा और साहित्य पढ़ाते हुए क्रिकेट-प्रेमी बने। इस स्मृति-संग्रह में इन्दौर आए या इन्दौर की क्रिकेट के प्रभुत्व खिलाड़ी, सफल खेल प्रशासक और साथी पत्रकारों का उनके जीवन आनन्द में आए योगदान को भावनात्मक ललक से प्रस्तुत किया है। आख़िर क्रिकेट-प्रेम ही उनके शिक्षक पेशे पर भारी पड़ा है।
एक समय देश और इन्दौर की क्रिकेट के महानायकों के जीवन की बारीकियों को उकेरनेवाली यह पुस्तक रोचकपूर्ण है। पुस्तक उस समय के इन्दौर की, और देश की क्रिकेट की स्थिति व
स्मृति को आज की बियाबानी दौड़ में सार्थकता प्रदान करती है। क्योंकि अतीत से ही भविष्य का वर्तमान साफ़ होता है और समझ आता है। पुस्तक पढ़ेंगे तो जानेंगे। Qadmon se napen to jis pich par kriket kheli jati hai, vah bais gaz ki hoti hai. Kriket ko jivan se juda khel bhi mana jata hai. Jivan jitna danv-pech ya utar-chadhav se bhara-pura hota hai utna hi asthir va romanchak khel kriket hota hai. Jis kriket ko jivan ki tarah dekha jata hai, usi se jivan ko khalne ki prerna bhi milti hai. Khel ke sansmran bhi apne jivan ko gadhte hain. Isaliye ‘bais gaz ki duniya’ ka ye smriti-sangrah hai. Lekhak ke akadmik sarokaron ke alava jo smritiyan unhonne is pustak mein sanjoi hain, unse hi lekhak ka sansar bana hai. Lekhak indaur ke ek mahavidyalay mein angrezi bhasha aur sahitya padhate hue kriket-premi bane. Is smriti-sangrah mein indaur aae ya indaur ki kriket ke prbhutv khiladi, saphal khel prshasak aur sathi patrkaron ka unke jivan aanand mein aae yogdan ko bhavnatmak lalak se prastut kiya hai. Aakhir kriket-prem hi unke shikshak peshe par bhari pada hai.
Ek samay desh aur indaur ki kriket ke mahanaykon ke jivan ki barikiyon ko ukernevali ye pustak rochakpurn hai. Pustak us samay ke indaur ki, aur desh ki kriket ki sthiti va
Smriti ko aaj ki biyabani daud mein sarthakta prdan karti hai. Kyonki atit se hi bhavishya ka vartman saaf hota hai aur samajh aata hai. Pustak padhenge to janenge.