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Badlon Ke Ghere

Krishna Sobti

Rs. 495 Rs. 441

आधुनिक हिन्दी कथा-जगत में अपने संवेदनशील गद्य और अमर पात्रों के लिए जानी जानेवाली कथाकार कृष्णा सोबती की प्रारम्भिक कहानियाँ इस पुस्तक में संकलित हैं। शब्दों की आत्मा से साक्षात्कार करनेवाली कृष्णा सोबती ने अपनी रचना-यात्रा के हर पड़ाव पर किसी-न-किसी सुखद विस्मय से हिन्दी-जगत को रू-ब-रू कराया है। ये... Read More

Description

आधुनिक हिन्दी कथा-जगत में अपने संवेदनशील गद्य और अमर पात्रों के लिए जानी जानेवाली कथाकार कृष्णा सोबती की प्रारम्भिक कहानियाँ इस पुस्तक में संकलित हैं। शब्दों की आत्मा से साक्षात्कार करनेवाली कृष्णा सोबती ने अपनी रचना-यात्रा के हर पड़ाव पर किसी-न-किसी सुखद विस्मय से हिन्दी-जगत को रू-ब-रू कराया है। ये कहानियाँ कथ्य और शिल्प, दोनों दृष्टियों से कृष्णा जी के रचनात्मक वैविध्य को रेखांकित करती हैं। इनमें जीवन के विविध रंग और चेहरे अपनी जीवन्त उपस्थिति से समकालीन समाज के सच को प्रकट करते हैं। समय का सच इन कहानियों में इतनी व्यापकता के साथ अभिव्यक्त हुआ है कि आज के बदलते परिवेश में भी इनकी प्रासंगिकता बनी हुई है। अनुभव की तटस्थता और सामाजिक परिवर्तन के द्वन्द्व से उपजी ये कहानियाँ अपने समय और समाज को जिस आन्तरिकता और अन्तरंगता से रेखांकित करती हैं, वह निश्चय ही दुर्लभ है। Aadhunik hindi katha-jagat mein apne sanvedanshil gadya aur amar patron ke liye jani janevali kathakar krishna sobti ki prarambhik kahaniyan is pustak mein sanklit hain. Shabdon ki aatma se sakshatkar karnevali krishna sobti ne apni rachna-yatra ke har padav par kisi-na-kisi sukhad vismay se hindi-jagat ko ru-ba-ru karaya hai. Ye kahaniyan kathya aur shilp, donon drishtiyon se krishna ji ke rachnatmak vaividhya ko rekhankit karti hain. Inmen jivan ke vividh rang aur chehre apni jivant upasthiti se samkalin samaj ke sach ko prkat karte hain. Samay ka sach in kahaniyon mein itni vyapakta ke saath abhivyakt hua hai ki aaj ke badalte parivesh mein bhi inki prasangikta bani hui hai. Anubhav ki tatasthta aur samajik parivartan ke dvandv se upji ye kahaniyan apne samay aur samaj ko jis aantarikta aur antrangta se rekhankit karti hain, vah nishchay hi durlabh hai.