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Aur, Pani Utar Gaya

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धरती पर जीवन की कड़ियों को जोड़नेवाला अनमोल पानी ग़ायब होने की कगार पर है। पानी पर लिखी ये चन्द बातें एक स्मरण पत्र भी हैं और चेतावनी भी। स्मरण हमारी नायाब जल परम्पराओं का, जल संरक्षण के बेजोड़ तरीक़ों का और जीवन से जुड़े पानी के अनेक प्रसंगों का।... Read More

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Description

धरती पर जीवन की कड़ियों को जोड़नेवाला अनमोल पानी ग़ायब होने की कगार पर है।
पानी पर लिखी ये चन्द बातें एक स्मरण पत्र भी हैं और चेतावनी भी। स्मरण हमारी नायाब जल परम्पराओं का, जल संरक्षण के बेजोड़ तरीक़ों का और जीवन से जुड़े पानी के अनेक प्रसंगों का। याद करें पानी से जुड़े संस्कारों और पग-पग पर पानी की बातों को।
दर्जनों सरकारी महकमों, सैकड़ों संगठनों, हज़ारों आन्दोलनों और लाखों लोगों के जल संरक्षण के प्रयास खरे नहीं उतर पाए, क्योंकि उन प्रयासों में न ज़िद थी, न जुनून और न जुझारूपन। आज भारत के अधिकांश हिस्से जलसंकट की गिरफ़्त में हैं। देश की आबादी 120 करोड़ पहुँच चुकी है, साथ ही जलस्रोत घटकर एक-चौथाई पर आ सिकुड़े हैं। देश और दुनिया की बढ़ती विकास दर का पानी से सीधा ताल्लुक़ है। यदि पानी न रहा तो हमारे समूचे विकास पर ही पानी फिर सकता है।
इस पुस्तक में लिखी बातें पानी को लेकर लेखक की चिन्ताएँ हैं, कोशिश है यह सबकी चिन्ता हो। ऐसा भी नहीं कि पानी की बातें पहले नहीं कही गई होंगी, ज़रूर कही गई होंगी, पर अब वक़्त के इस दौर में इसके मायने अहम हैं। भारतीय समाज, पानी से गहरे जुड़ा समाज था। हमारी परम्पराएँ, संस्कार, रीति-रिवाज और आदतें पानी से जुड़ी थीं।
दुर्भाग्य से यह उत्कृष्ट परम्परा टूटकर बिखर गई और आज हम एक भयावह भविष्य के सामने खड़े हैं। यह पुस्तक इसी आसन्न संकट के मद्देनज़र हमें जगाने की कोशिश है। Dharti par jivan ki kadiyon ko jodnevala anmol pani gayab hone ki kagar par hai. Pani par likhi ye chand baten ek smran patr bhi hain aur chetavni bhi. Smran hamari nayab jal parampraon ka, jal sanrakshan ke bejod tariqon ka aur jivan se jude pani ke anek prsangon ka. Yaad karen pani se jude sanskaron aur pag-pag par pani ki baton ko.
Darjnon sarkari mahakmon, saikdon sangathnon, hazaron aandolnon aur lakhon logon ke jal sanrakshan ke pryas khare nahin utar paye, kyonki un pryason mein na zid thi, na junun aur na jujharupan. Aaj bharat ke adhikansh hisse jalsankat ki giraft mein hain. Desh ki aabadi 120 karod pahunch chuki hai, saath hi jalasrot ghatkar ek-chauthai par aa sikude hain. Desh aur duniya ki badhti vikas dar ka pani se sidha talluq hai. Yadi pani na raha to hamare samuche vikas par hi pani phir sakta hai.
Is pustak mein likhi baten pani ko lekar lekhak ki chintayen hain, koshish hai ye sabki chinta ho. Aisa bhi nahin ki pani ki baten pahle nahin kahi gai hongi, zarur kahi gai hongi, par ab vaqt ke is daur mein iske mayne aham hain. Bhartiy samaj, pani se gahre juda samaj tha. Hamari paramprayen, sanskar, riti-rivaj aur aadten pani se judi thin.
Durbhagya se ye utkrisht parampra tutkar bikhar gai aur aaj hum ek bhayavah bhavishya ke samne khade hain. Ye pustak isi aasann sankat ke maddenzar hamein jagane ki koshish hai.