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Asmita Aur Anyata

Alok Tandon

Rs. 395 Rs. 356

Vani Prakashan

भूमण्डलीकरण ने जहाँ एक ओर आधुनिकता और परम्परागत संस्कृतियों के बीच द्वन्द्व को और तीखा किया है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न सांस्कृतिक समूहों को एक-दूसरे के सामने खड़ा करके टकराव की स्थिति भी उत्पन्न कर दी है। अपनी-अपनी सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा एक व्यापक मुद्दा बन गया है। ‘हम’ और... Read More

Description

भूमण्डलीकरण ने जहाँ एक ओर आधुनिकता और परम्परागत संस्कृतियों के बीच द्वन्द्व को और तीखा किया है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न सांस्कृतिक समूहों को एक-दूसरे के सामने खड़ा करके टकराव की स्थिति भी उत्पन्न कर दी है। अपनी-अपनी सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा एक व्यापक मुद्दा बन गया है। ‘हम’ और ‘वे’ के बीच विभाजक रेखा हिंसा को जन्म दे रही है। समस्या के निदान हेतु आधुनिकता और संस्कृति के अन्तःसम्बन्धों की पड़ताल ज़रूरी है। एक सामाजिक बुद्धिजीवी के दायित्व का निर्वाह करते हुए लेखक ने जहाँ सांस्कृतिक अस्मिता की ज़रूरत के महत्त्व को स्वीकारा है, वहीं उसकी जड़ता और कट्टरता के परे जाने की वकालत भी की है। इसी की तलाश में अर्जित प्रस्तुत आलेख एक समानधर्मी संवाद की प्रत्याशा से पाठकों को सम्बोधित है। bhumanDlikran ne jahan ek or adhunikta aur parampragat sanskritiyon ke beech dvandv ko aur tikha kiya hai, vahin dusri or vibhinn sanskritik samuhon ko ek dusre ke samne khaDa karke takrav ki sthiti bhi utpann kar di hai. apni apni sanskritik asmita ki raksha ek vyapak mudda ban gaya hai. ‘ham’ aur ‘ve’ ke beech vibhajak rekha hinsa ko janm de rahi hai. samasya ke nidan hetu adhunikta aur sanskriti ke antःsambandhon ki paDtal zaruri hai. ek samajik buddhijivi ke dayitv ka nirvah karte hue lekhak ne jahan sanskritik asmita ki zarurat ke mahattv ko svikara hai, vahin uski jaDta aur kattarta ke pare jane ki vakalat bhi ki hai. isi ki talash mein arjit prastut alekh ek samandharmi sanvad ki pratyasha se pathkon ko sambodhit hai.