-11%

Apra

Rs. 300 Rs. 267

‘अपरा’ पहली बार सन् 1946 में प्रकाशित हुई थी, इसमें महाकवि निराला की उस समय तक प्रकाशित उनके सभी संग्रहों में से चुनी हुई कविताएँ संकलित हैं। चयन स्वयं निराला ने किया था, इसलिए इसकी महत्ता स्वतःसिद्ध है। यहाँ संकलित कविताओं से निराला के कवि-रूप का समग्र परिचय प्राप्त किया... Read More

BlackBlack
Description

‘अपरा’ पहली बार सन् 1946 में प्रकाशित हुई थी, इसमें महाकवि निराला की उस समय तक प्रकाशित उनके सभी संग्रहों में से चुनी हुई कविताएँ संकलित हैं। चयन स्वयं निराला ने किया था, इसलिए इसकी महत्ता स्वतःसिद्ध है। यहाँ संकलित कविताओं से निराला के कवि-रूप का समग्र परिचय प्राप्त किया जा सकता है। इस अर्थ में यह संकलन ‘गागर में सागर’ ही है। ‘apra’ pahli baar san 1946 mein prkashit hui thi, ismen mahakavi nirala ki us samay tak prkashit unke sabhi sangrhon mein se chuni hui kavitayen sanklit hain. Chayan svayan nirala ne kiya tha, isaliye iski mahatta svatःsiddh hai. Yahan sanklit kavitaon se nirala ke kavi-rup ka samagr parichay prapt kiya ja sakta hai. Is arth mein ye sanklan ‘gagar mein sagar’ hi hai.

Additional Information
Color

Black

Publisher
Language
ISBN
Pages
Publishing Year