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साम्प्रदायिक सद्भाव, अध्यात्म, प्रकृति, धर्म, दर्शन के विभिन्न रूपों-रंगों को बिखेरती ये कविताएँ एक इन्द्रधनुष बनाती हैं। सामान्य-सी दिखनेवाली ये कविताएँ गहन, गूढ़ अर्थ रखती हैं और पाठक को संवेदना, चिन्तन का दोहरा आस्वाद देती हैं। कवि विनोद कुमार चौधरी ने इन कविताओं को लोकभाषा का सौन्दर्य प्रदान कर उस... Read More

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Description

साम्प्रदायिक सद्भाव, अध्यात्म, प्रकृति, धर्म, दर्शन के विभिन्न रूपों-रंगों को बिखेरती ये कविताएँ एक इन्द्रधनुष बनाती हैं।
सामान्य-सी दिखनेवाली ये कविताएँ गहन, गूढ़ अर्थ रखती हैं और पाठक को संवेदना, चिन्तन का दोहरा आस्वाद देती हैं।
कवि विनोद कुमार चौधरी ने इन कविताओं को लोकभाषा का सौन्दर्य प्रदान कर उस गौरवशाली परम्परा और काव्य-शैली को प्रतिष्ठापित किया है। जिसमें हर शब्द के बहुआयामी अर्थ होते हैं और जो लोगों के साथ वस्तुओं और वनस्पतियों को भी गरिमा, गौरव और सम्मान प्रदान करती है।
कवि नदी की ‘आत्मा’ के प्रति समर्पण भावना प्रदर्शित करते हुए प्रार्थना कर उसका अभिवादन करता है। उसकी श्रेष्ठता हमारे मानस में जगाता है और जन्म-भूमि की स्मृतियों को आभा-दीप्त करते हुए बताता है कि स्मृतियाँ हमारी धरोहर हैं, जो मन-आत्मा को सन्तोष प्रदान कर जीवन को प्रवहमान बनाती हैं।
अतीत और वर्तमान के बीच गहन रिश्ता बनाती ये कविताएँ हर वर्ग, हर आयु के पाठकों का ध्यान आकर्षित करने में सक्षम हैं। Samprdayik sadbhav, adhyatm, prkriti, dharm, darshan ke vibhinn rupon-rangon ko bikherti ye kavitayen ek indradhnush banati hain. Samanya-si dikhnevali ye kavitayen gahan, gudh arth rakhti hain aur pathak ko sanvedna, chintan ka dohra aasvad deti hain.
Kavi vinod kumar chaudhri ne in kavitaon ko lokbhasha ka saundarya prdan kar us gauravshali parampra aur kavya-shaili ko prtishthapit kiya hai. Jismen har shabd ke bahuayami arth hote hain aur jo logon ke saath vastuon aur vanaspatiyon ko bhi garima, gaurav aur samman prdan karti hai.
Kavi nadi ki ‘atma’ ke prati samarpan bhavna prdarshit karte hue prarthna kar uska abhivadan karta hai. Uski shreshthta hamare manas mein jagata hai aur janm-bhumi ki smritiyon ko aabha-dipt karte hue batata hai ki smritiyan hamari dharohar hain, jo man-atma ko santosh prdan kar jivan ko pravahman banati hain.
Atit aur vartman ke bich gahan rishta banati ye kavitayen har varg, har aayu ke pathkon ka dhyan aakarshit karne mein saksham hain.