BackBack
-11%

Antim Aakanksha

Rs. 125 Rs. 111

किसी के स्वस्थ व्यवहार और उपकार के प्रति समर्पण की सीमा तक पहुँची हुई ऐसी कृतज्ञता कि बचपन से चाकरी में रहनेवाला नौकर अपने हमउम्र स्वामि-पुत्र के परिवार में अगले जन्म में भी जन्म लेने और उस परिवार की चाकरी करने की अन्तिम आकांक्षा अन्तिम साँस लेते समय प्रकट कर... Read More

Description

किसी के स्वस्थ व्यवहार और उपकार के प्रति समर्पण की सीमा तक पहुँची हुई ऐसी कृतज्ञता कि बचपन से चाकरी में रहनेवाला नौकर अपने हमउम्र स्वामि-पुत्र के परिवार में अगले जन्म में भी जन्म लेने और उस परिवार की चाकरी करने की अन्तिम आकांक्षा अन्तिम साँस लेते समय प्रकट कर रहा हो—यही है वह अन्तरधारा जो इस उपन्यास में अनादि से अन्त तक प्रवाहित हो रही है। नौकर रमला को सेवा के पहले ही दिन पूरा नाम रामलाल से पुकारने का जो भाव उसका ख़ास पुत्र प्रकट करता है, वह भाव धीरे-धीरे अपने उत्कर्ष की ओर बढ़ता जाता है और रामलाल की अन्तिम आकांक्षा का कारण बन जाता है। उपन्यासकार सियारामशरण गुप्त अपने उपन्यासों में किसी न किसी ऐसी ही उत्कृष्ट भावना अथवा मान्यता को आधार बनाकर अपने उपन्यास की रचना करने के क़ायल थे, जिसे उन्होंने इस उपन्यास की भी अन्तरधारा के रूप में अपने कथानक में प्रवाहित किया है, जिससे उपन्यास रोचक और मनोरंजक बनने के साथ ही पाठक के अन्तर्मन को भी प्रभावित करनेवाला बन गया है Kisi ke svasth vyavhar aur upkar ke prati samarpan ki sima tak pahunchi hui aisi kritagyta ki bachpan se chakri mein rahnevala naukar apne hamumr svami-putr ke parivar mein agle janm mein bhi janm lene aur us parivar ki chakri karne ki antim aakanksha antim sans lete samay prkat kar raha ho—yahi hai vah antardhara jo is upanyas mein anadi se ant tak prvahit ho rahi hai. Naukar ramla ko seva ke pahle hi din pura naam ramlal se pukarne ka jo bhav uska khas putr prkat karta hai, vah bhav dhire-dhire apne utkarsh ki or badhta jata hai aur ramlal ki antim aakanksha ka karan ban jata hai. Upanyaskar siyaramashran gupt apne upanyason mein kisi na kisi aisi hi utkrisht bhavna athva manyta ko aadhar banakar apne upanyas ki rachna karne ke qayal the, jise unhonne is upanyas ki bhi antardhara ke rup mein apne kathanak mein prvahit kiya hai, jisse upanyas rochak aur manoranjak banne ke saath hi pathak ke antarman ko bhi prbhavit karnevala ban gaya hai