Anaro

Rs. 60

'कहाँ गया गंजी का बाप?...दिल डूब रहा है...अनारो, तू डूब चली...उड़ चली तू...अनारो, उड़ मत...धरती? धरती कहाँ गई?...पाँव टेक ले...हिम्मत कर...थाम ले रे...नन्दलाल! हमें बेटी ब्याहनी है!...यहाँ तो दलदल बन गया!...मैं सन गई पूरी की पूरी...हाय! नन्दलाल...गंजी...छोटू!'' महानगरीय झुग्गी कॉलोनी में रहकर कोठियों में खटनेवाली अनारो की इस चीख़ में... Read More

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Description

'कहाँ गया गंजी का बाप?...दिल डूब रहा है...अनारो, तू डूब चली...उड़ चली तू...अनारो, उड़ मत...धरती? धरती कहाँ गई?...पाँव टेक ले...हिम्मत कर...थाम ले रे...नन्दलाल! हमें बेटी ब्याहनी है!...यहाँ तो दलदल बन गया!...मैं सन गई पूरी की पूरी...हाय! नन्दलाल...गंजी...छोटू!'' महानगरीय झुग्गी कॉलोनी में रहकर कोठियों में खटनेवाली अनारो की इस चीख़ में किसी एक अनारो की नहीं, बल्कि प्रत्येक उस स्त्री की त्रासदी छुपी है जो आर्थिक अभावों, सामाजिक रूढ़ियों और पुरुष अत्याचार के पहाड़ ढोते हुए भी सम्मान सहित जीने का संघर्ष करती है। सौत, ग़रीबी और बच्चे; नन्दलाल ने उसे क्या नहीं दिया? फिर भी वह उसकी ब्याहता है, उस पर गुमान करती है और चाहती है कि कारज-त्यौहार में वह उसके बराबर तो खड़ा रहे। दरअसल अनारो दु:ख और जीवट से एक साथ रची गई ऐसी मूरत है, जिसमें उसके वर्ग की सारी भयावह सच्चाइयाँ पूँजीभूत हो उठी हैं। Kahan gaya ganji ka bap?. . . Dil dub raha hai. . . Anaro, tu dub chali. . . Ud chali tu. . . Anaro, ud mat. . . Dharti? dharti kahan gai?. . . Panv tek le. . . Himmat kar. . . Tham le re. . . Nandlal! hamein beti byahni hai!. . . Yahan to daldal ban gaya!. . . Main san gai puri ki puri. . . Hay! nandlal. . . Ganji. . . Chhotu! mahanagriy jhuggi kauloni mein rahkar kothiyon mein khatnevali anaro ki is chikh mein kisi ek anaro ki nahin, balki pratyek us stri ki trasdi chhupi hai jo aarthik abhavon, samajik rudhiyon aur purush atyachar ke pahad dhote hue bhi samman sahit jine ka sangharsh karti hai. Saut, garibi aur bachche; nandlal ne use kya nahin diya? phir bhi vah uski byahta hai, us par guman karti hai aur chahti hai ki karaj-tyauhar mein vah uske barabar to khada rahe. Darasal anaro du:kha aur jivat se ek saath rachi gai aisi murat hai, jismen uske varg ki sari bhayavah sachchaiyan punjibhut ho uthi hain.