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Amrit Manthan

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‘अमृत मंथन’ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ओजस्वी कविताओं का संकलन है। इस पुस्तक में दिनकर जी की कुछ कविताएँ 1945 से 1948 के बीच लिखी गई थीं, जो तत्कालीन परिस्थितियों की दस्तावेज़ हैं तथा राष्ट्रकवि की जनहित के प्रति प्रतिबद्ध मानसिकता को हमारे सामने लाती हैं। इन कविताओं में... Read More

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Description

‘अमृत मंथन’ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ओजस्वी कविताओं का संकलन है।
इस पुस्तक में दिनकर जी की कुछ कविताएँ 1945 से 1948 के बीच लिखी गई थीं, जो तत्कालीन परिस्थितियों की दस्तावेज़ हैं तथा राष्ट्रकवि की जनहित के प्रति प्रतिबद्ध मानसिकता को हमारे सामने लाती हैं।
इन कविताओं में जहाँ देश के विराट व्यक्तित्वों के प्रति कवि का श्रद्धा-निवेदन है, वहीं कुछ कविताओं में उत्कट देश-प्रेम की ओजस्वी अभिव्यक्ति है। कुछ कविताएँ देशी एवं विदेशी कवियों की उत्कृष्ट रचनाओं का सरस अनुवाद हैं तो कुछ कविताओं में निसर्ग का सुन्दर चित्रण है।
इन कविताओं की विशेषता है—इनकी प्रांजल, प्रवाहमयी भाषा, उच्चकोटि का छंद-विधान और सहज भाव-सम्‍प्रेषण।
हिन्दी काव्य के स्वर्ण-युग की यात्रा करने के लिए यह पुस्तक उत्तम साधन है। ‘amrit manthan’ rashtrakavi ramdhari sinh ‘dinkar’ ki ojasvi kavitaon ka sanklan hai. Is pustak mein dinkar ji ki kuchh kavitayen 1945 se 1948 ke bich likhi gai thin, jo tatkalin paristhitiyon ki dastavez hain tatha rashtrakavi ki janhit ke prati pratibaddh manasikta ko hamare samne lati hain.
In kavitaon mein jahan desh ke virat vyaktitvon ke prati kavi ka shraddha-nivedan hai, vahin kuchh kavitaon mein utkat desh-prem ki ojasvi abhivyakti hai. Kuchh kavitayen deshi evan videshi kaviyon ki utkrisht rachnaon ka saras anuvad hain to kuchh kavitaon mein nisarg ka sundar chitran hai.
In kavitaon ki visheshta hai—inki pranjal, prvahamyi bhasha, uchchkoti ka chhand-vidhan aur sahaj bhav-sam‍preshan.
Hindi kavya ke svarn-yug ki yatra karne ke liye ye pustak uttam sadhan hai.