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Allamprabhu : Pratibha Ka Shikhar

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अज्ञान रूपी पालने में ज्ञान रूपी शिशु सुलाकर सकल वेदशास्त्र रूपी रस्सी से बाँधकर झूला, झुलाती हुई पालने लोरी गा रही है, भ्रान्ति रूपी माई! जब तक पालना न टूटे, रस्सी न कटे लोरी बन्द न हो तब तक गुहेश्वर लिंग के दर्शन नहीं होंगे॥ अल्लम सृजनशीलता के प्रति विश्वास... Read More

Description

अज्ञान रूपी पालने में
ज्ञान रूपी शिशु सुलाकर
सकल वेदशास्त्र रूपी रस्सी से बाँधकर झूला,
झुलाती हुई पालने
लोरी गा रही है, भ्रान्ति रूपी माई!
जब तक पालना न टूटे, रस्सी न कटे
लोरी बन्द न हो
तब तक गुहेश्वर लिंग के दर्शन नहीं होंगे॥
अल्लम सृजनशीलता के प्रति विश्वास रखते हैं कि ‘नि:शब्द ज्ञान क्या शब्दों की साधना से सम्भव है?’
बहती नदी को देह भर पाँव
जलती आग को देह भर जिह्वा
बहती हवा को देह भर हाथ
अतः गुहेश्वर, तेरे शरण का सर्वांग लिंगमय है॥ Agyan rupi palne meinGyan rupi shishu sulakar
Sakal vedshastr rupi rassi se bandhakar jhula,
Jhulati hui palne
Lori ga rahi hai, bhranti rupi mai!
Jab tak palna na tute, rassi na kate
Lori band na ho
Tab tak guheshvar ling ke darshan nahin honge॥
Allam srijanshilta ke prati vishvas rakhte hain ki ‘ni:shabd gyan kya shabdon ki sadhna se sambhav hai?’
Bahti nadi ko deh bhar panv
Jalti aag ko deh bhar jihva
Bahti hava ko deh bhar hath
Atः guheshvar, tere sharan ka sarvang lingmay hai॥