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Ajeeb Aadmi

Rs. 395

मंगला चोट खाई नागिन की तरह पलटकर ख़ुद ही को डसने लगी। उसके पति ने, जो उसका आशिक भी था, माशूक भी, उसके नारीत्व को ठुकराया था। उसके प्यार का अपमान किया था। उसकी कला का गला घोंट दिया था। कभी उसकी आवाज गली-कूचों में गूँजा करती थी, ख़ुद को... Read More

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Description

मंगला चोट खाई नागिन की तरह पलटकर ख़ुद ही को डसने लगी। उसके पति ने, जो उसका आशिक भी था, माशूक भी, उसके नारीत्व को ठुकराया था। उसके प्यार का अपमान किया था। उसकी कला का गला घोंट दिया था। कभी उसकी आवाज गली-कूचों में गूँजा करती थी, ख़ुद को सारी दुनिया पर छाई हुई महसूस करती थी। अब उसके गाने कभी-कभी ही रेडियो पर सुनाई देते। दुनिया ने उसे ज़‍िन्दा ही दफ़न करना शुरू कर दिया था। और इस कफ़न-दफ़न में धर्म—उसके पति का हाथ सबसे आगे था। अपनी फ़‍िल्मों के लिए रिज़र्व करके, फिर एकदम दो कौड़ी की एक लड़की जरीन की ख़ातिर उसे दूध की मक्खी की तरह निकल फेंका। आख़‍िर मंगला अपने अस्तित्व की रक्षा में सफल हो सकी? धर्मदेव और जरीन के प्यार का क्या हुआ? क्या वह परवान चढ़ सका; क्‍या फिर मंगला और धर्मदेव का मिलन हो सका? बहुचर्चित-प्रशंसित लेखिका इस्मत चुग़ताई का एक रोमांटिक उपन्यास है—‘अजीब आदमी’। इस उपन्यास में लेखिका ने फ़‍िल्म-जगत की रंगीनियों की यथार्थ झाँकी बड़ी बेबाकी से प्रस्तुत की है। बेहद रोचक और पठनीय उपन्यास। Mangla chot khai nagin ki tarah palatkar khud hi ko dasne lagi. Uske pati ne, jo uska aashik bhi tha, mashuk bhi, uske naritv ko thukraya tha. Uske pyar ka apman kiya tha. Uski kala ka gala ghont diya tha. Kabhi uski aavaj gali-kuchon mein gunja karti thi, khud ko sari duniya par chhai hui mahsus karti thi. Ab uske gane kabhi-kabhi hi rediyo par sunai dete. Duniya ne use za‍inda hi dafan karna shuru kar diya tha. Aur is kafan-dafan mein dharm—uske pati ka hath sabse aage tha. Apni fa‍ilmon ke liye rizarv karke, phir ekdam do kaudi ki ek ladki jarin ki khatir use dudh ki makkhi ki tarah nikal phenka. Aakh‍ir mangla apne astitv ki raksha mein saphal ho saki? dharmdev aur jarin ke pyar ka kya hua? kya vah parvan chadh saka; ‍ya phir mangla aur dharmdev ka milan ho saka? bahucharchit-prshansit lekhika ismat chugtai ka ek romantik upanyas hai—‘ajib aadmi’. Is upanyas mein lekhika ne fa‍ilm-jagat ki ranginiyon ki yatharth jhanki badi bebaki se prastut ki hai. Behad rochak aur pathniy upanyas.