BackBack
-11%

Agni Aur Barkha

Rs. 250 Rs. 223

इतिहास, पुराण, जातक और लोकथाएँ गिरीश कारनाड के लिए सर्वाधिक समृद्ध उत्प्रेरक और आकर्षक कथा-बीज स्रोत रहे हैं। नई दृष्टि एवं संवेदना के वहन के लिए वे अपनी रचना का शरीर अतीत से चुनते हैं। उनकी विशिष्टता यह है कि वे मिथकीय कथानकों से आधुनिक और सामयिक समस्याओं के सम्प्रेषण... Read More

BlackBlack
Description

इतिहास, पुराण, जातक और लोकथाएँ गिरीश कारनाड के लिए सर्वाधिक समृद्ध उत्प्रेरक और आकर्षक कथा-बीज स्रोत रहे हैं। नई दृष्टि एवं संवेदना के वहन के लिए वे अपनी रचना का शरीर अतीत से चुनते हैं। उनकी विशिष्टता यह है कि वे मिथकीय कथानकों से आधुनिक और सामयिक समस्याओं के सम्प्रेषण का काम लेते हैं। अग्नि और बरखा के लिए कारनाड पुनः अतीत की ओर लौटे हैं, इसके केन्द्र में है–महाभारत का वन पर्व। अपने वनवास काल में देशाटन में पांडव इधर-उधर भटक रहे हैं। सन्त लोमष इन्हें यवक्री अर्थात् यवक्रत की गाथा सुनाते हैं। महाभारत जैसी महागाथा का पटल इतना जटिल है कि ऐसे छोटे वृत्तान्त पर ध्यान न जाना स्वाभाविक था, लेकिन कारनाड को इस कथा ने सर्वाधिक प्रभावित किया। इस कथा के भीतर कई गम्भीर अर्थ विद्यमान हैं, नाटककार इस नाट्य-रूपान्तर में इसके निहित अर्थों व अभिप्रायों को स्पष्ट करता है। अतीत के प्रकाश में वर्तमान धुँधलके को साफ़ और उजला करने की यह रचनात्मक कोशिश निःसन्देह पठनीय और दर्शनीय है, इसका एक प्रमाण यह भी है कि अब तक इस नाटक के दर्जनों सफल मंचन हो चुके हैं। Itihas, puran, jatak aur lokthayen girish karnad ke liye sarvadhik samriddh utprerak aur aakarshak katha-bij srot rahe hain. Nai drishti evan sanvedna ke vahan ke liye ve apni rachna ka sharir atit se chunte hain. Unki vishishtta ye hai ki ve mithkiy kathankon se aadhunik aur samyik samasyaon ke sampreshan ka kaam lete hain. Agni aur barkha ke liye karnad punः atit ki or laute hain, iske kendr mein hai–mahabharat ka van parv. Apne vanvas kaal mein deshatan mein pandav idhar-udhar bhatak rahe hain. Sant lomash inhen yavakri arthat yavakrat ki gatha sunate hain. Mahabharat jaisi mahagatha ka patal itna jatil hai ki aise chhote vrittant par dhyan na jana svabhavik tha, lekin karnad ko is katha ne sarvadhik prbhavit kiya. Is katha ke bhitar kai gambhir arth vidyman hain, natakkar is natya-rupantar mein iske nihit arthon va abhiprayon ko spasht karta hai. Atit ke prkash mein vartman dhundhalake ko saaf aur ujla karne ki ye rachnatmak koshish niःsandeh pathniy aur darshniy hai, iska ek prman ye bhi hai ki ab tak is natak ke darjnon saphal manchan ho chuke hain.