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Agha Hashra Kashmiri Ke Chuninda Drame : Vols. 1-2

Rs. 1,100 Rs. 979

पारसी थिएटर हमारी बहुमूल्य विरासत है, इसलिए हमें इसकी हिफ़ाज़त भी करनी है। ‘राष्ट्रीय नाट्‌य विद्यालय’ में पारसी नाटकों के मंचन की परम्परा रही है। यह भी एक सत्य है कि उत्तर भारत के सभी नगरों और महानगरों में रंगकर्मी इस परम्परा से जुड़ने पर सुख और सन्‍तोष का अनुभव... Read More

Description

पारसी थिएटर हमारी बहुमूल्य विरासत है, इसलिए हमें इसकी हिफ़ाज़त भी करनी है। ‘राष्ट्रीय नाट्‌य विद्यालय’ में पारसी नाटकों के मंचन की परम्परा रही है। यह भी एक सत्य है कि उत्तर भारत के सभी नगरों और महानगरों में रंगकर्मी इस परम्परा से जुड़ने पर सुख और सन्‍तोष का अनुभव करते हैं। शायद यही कारण है कि देश-भर के रंगकर्मी समय-समय पर पारसी नाटकों, विशेषकर आग़ा हश्र काश्मीरी के नाटकों की माँग करते रहते हैं।
दो खंडों की इस पुस्तक में आगा हश्र के दस चर्चित नाटकों के साथ उनके जीवन व योगदान पर एक लम्बा शोधपरक लेख भी शामिल है। पहले खंड में 'असीर-ए-हिर्स', 'सफ़ेद ख़ून', 'सैद-ए-हवस' तथा 'ख़ूबसूरत बला' नाटकों को शामिल किया गया है। दूसरे खंड में हैं—'सिल्वर किंग', 'यहूदी की लड़की', 'आँख का नशा', 'बिल्वा मंगल', 'सीता बनबास' तथा 'रुस्तम-ओ-सोहराब'। इन नाटकों के लिप्यन्‍तरण में शब्दार्थ के साथ-साथ इस बात का भी पूरा ध्यान रखा गया है कि उर्दू शब्दों का यथासम्‍भव सही उच्चारण हो सके और ख़ास तौर पर अभिनेताओं तथा रंगकर्मियों को संवाद अदायगी में कोई दिक्‍़क़त पेश न आए। Parsi thiyetar hamari bahumulya virasat hai, isaliye hamein iski hifazat bhi karni hai. ‘rashtriy nat‌ya vidyalay’ mein parsi natkon ke manchan ki parampra rahi hai. Ye bhi ek satya hai ki uttar bharat ke sabhi nagron aur mahanagron mein rangkarmi is parampra se judne par sukh aur san‍tosh ka anubhav karte hain. Shayad yahi karan hai ki desh-bhar ke rangkarmi samay-samay par parsi natkon, visheshkar aaga hashr kashmiri ke natkon ki mang karte rahte hain. Do khandon ki is pustak mein aaga hashr ke das charchit natkon ke saath unke jivan va yogdan par ek lamba shodhaprak lekh bhi shamil hai. Pahle khand mein asir-e-hirs, safed khun, said-e-havas tatha khubsurat bala natkon ko shamil kiya gaya hai. Dusre khand mein hain—silvar king, yahudi ki ladki, ankh ka nasha, bilva mangal, sita banbas tatha rustam-o-sohrab. In natkon ke lipyan‍taran mein shabdarth ke sath-sath is baat ka bhi pura dhyan rakha gaya hai ki urdu shabdon ka yathasam‍bhav sahi uchcharan ho sake aur khas taur par abhinetaon tatha rangkarmiyon ko sanvad adaygi mein koi dik‍qat pesh na aae.