ADHRANGE KHWAAB (POETRY)
ISBN | NA |
Language | Hindi |
Publisher | Bodhi Prakashan |
Pages | - |
Dimensions | NA |
Edition | 1st |

ADHRANGE KHWAAB (POETRY)
'अधरंगे ख्वाब' राजेन्द्र शर्मा का दूसरा कविता-संग्रह है। उनके पहले कविता संग्रह 'ऋण अभी शेष है' ने अपनी सहज भाषा और जीवन से भरपूर कविताओं के जरिए कविता-प्रेमियों का ध्यान आकृष्ट किया था। राजेन्द्र शर्मा मुंबई में रहकर सिनेमा के क्षेत्र में सिनेमेटोग्राफी एवं डायरेक्शन का काम करते हैं लेकिन वे मूलत: कवि हैं, यह उनकी कविताएं पढ़कर सहज ही समझा जा सकता है। राजेन्द्र शर्मा अपनी कविताओं के जरिए एक समतामूलक समाज का स्वप्न देखते हैं और उन चीज़ों की गहरी पड़ताल करते हैं जो हमें निरंतर अमानुष बना रही हैं। उनकी कविताओं का संसार स्मृतियों और स्वप्नों से बना है। उनमें महानगर भी है और अपनी धरती और आकाश भी। बारिश में भीगने की स्मृति है तो प्रथम मिलन का उल्लास भी है। वे बंद कमरों में होने वाली बौद्धिक बहसों की निर्रथकता की पहचान भी करते हैं तो नगरवधुओं की वेदना को भी व्यक्त करते हैं। राजेन्द्र शर्मा किसी भी अच्छे कवि की तरह शब्दों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। वे शब्दों का पीछा करते हैं और उनके ओझल अर्थों को खोलते हैं। इनकी कविताओं में इंद्राणी मुखर्जी जैसे चरित्र भी अपनी जगह बनाते हैं और हमारे आसपास घटने वाली आपदाएं भी। एक खोया हुआ संसार बार बार यहां दस्तक देता है। 'अधरंगे ख्वाब' की कविताएं हिंदी कविता संसार में अपनी अलग जगह बनाएंगी और भविष्य में राजेन्द्र शर्मा का कविताकर्म अधिक व्यापक होगा। तथास्तु। - कृष्ण कल्पित
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