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Aaydakki Marayya-Aaydakki Lakkamma

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अहंकार की भक्ति से धन का नाश क्रियाहीन बातों से ज्ञान का नाश दान दिए बिना दानी कहलाना केश बिना शृंगार जैसा दृढ़ताहीन भक्ति तलहीन कुंभ में पूजा जल भरने जैसी मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग को यह न छूनेवाली भक्ति है॥ कायक की कमाई समझ भक्त दान की कमाई से दासोह कर... Read More

Description

अहंकार की भक्ति से धन का नाश
क्रियाहीन बातों से ज्ञान का नाश
दान दिए बिना दानी कहलाना केश बिना शृंगार जैसा
दृढ़ताहीन भक्ति तलहीन कुंभ में पूजा जल भरने जैसी
मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग को यह न छूनेवाली भक्ति है॥
कायक की कमाई समझ भक्त दान की कमाई से
दासोह कर सकते हैं कभी?
इक मन से लाकर इक मन से ही
मन बदलने से पहले ही
मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग को
समर्पित करना चाहिए मारय्या॥
जो मन से शुद्ध नहीं, उसमें धन की ग़रीबी हो सकती है,
चित्त शुद्धि से कायक करनेवाले
सद्भक्तों को तो जहाँ देखो वहाँ लक्ष्मी अपने आप मिलेगी
मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग की सेवा में लगे रहने तक॥
—लक्कमा
कायक में मग्न हो तो
गुरुदर्शन को भी भूलना चाहिए।
लिंग पूजा को भी भूलना चाहिए।
जंगम सामने होने पर भी उसके दाक्षिण्य में न पड़ना चाहिए।
कायक ही कैलास होने के कारण
अमरेश्वरलिंग को भी कायक करना है॥
—मारय्या
दो नयनों की भक्ति एक दृष्टि में देखने की तरह सती-पति एक भक्ति में देखने से गुहेश्वर को भक्ति स्वीकार है। Ahankar ki bhakti se dhan ka nashKriyahin baton se gyan ka nash
Daan diye bina dani kahlana kesh bina shringar jaisa
Dridhtahin bhakti talhin kumbh mein puja jal bharne jaisi
Marayyapriy amreshvarling ko ye na chhunevali bhakti hai॥
Kayak ki kamai samajh bhakt daan ki kamai se
Dasoh kar sakte hain kabhi?
Ik man se lakar ik man se hi
Man badalne se pahle hi
Marayyapriy amreshvarling ko
Samarpit karna chahiye marayya॥
Jo man se shuddh nahin, usmen dhan ki garibi ho sakti hai,
Chitt shuddhi se kayak karnevale
Sadbhakton ko to jahan dekho vahan lakshmi apne aap milegi
Marayyapriy amreshvarling ki seva mein lage rahne tak॥
—lakkma
Kayak mein magn ho to
Gurudarshan ko bhi bhulna chahiye.
Ling puja ko bhi bhulna chahiye.
Jangam samne hone par bhi uske dakshinya mein na padna chahiye.
Kayak hi kailas hone ke karan
Amreshvarling ko bhi kayak karna hai॥
—marayya
Do naynon ki bhakti ek drishti mein dekhne ki tarah sati-pati ek bhakti mein dekhne se guheshvar ko bhakti svikar hai.

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