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Aatmakatha : Dr. Karan Singh

Rs. 650 Rs. 579

डॉ. कर्ण सिंह को आधुनिक भारत के चिन्तकों और राजनयिकों में एक महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मूलत: अंग्रेज़ी में प्रकाशित यह पुस्तक पहले दो खंडों में थी। बाद में इसे एक ही जिल्द में समेटा गया जिसमें ख़ास तौर से इसी संस्करण के लिए लिखी गई एक महत्त्वपूर्ण प्रस्तावना भी... Read More

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Description

डॉ. कर्ण सिंह को आधुनिक भारत के चिन्तकों और राजनयिकों में एक महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मूलत: अंग्रेज़ी में प्रकाशित यह पुस्तक पहले दो खंडों में थी। बाद में इसे एक ही जिल्द में समेटा गया जिसमें ख़ास तौर से इसी संस्करण के लिए लिखी गई एक महत्त्वपूर्ण प्रस्तावना भी शामिल थी। यह इसी का हिन्‍दी संस्करण है। डॉ. कर्ण सिंह की यह ‘आत्मकथा’ भारतीय इतिहास के एक महत्त्वपूर्ण दौर का लेखा–जोखा प्रस्तुत करती है जिसमें भारत की स्वतंत्रता–प्राप्ति की घटना के अलावा जम्मू–कश्मीर की राजनीति, चीन और पाकिस्तान के साथ विवाद और पं. जवाहरलाल नेहरू व लालबहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्रित्व काल की घटनाएँ शामिल हैं। इस बाह्य घटना–चक्र के अलावा इस पुस्तक में आप डॉ. कर्ण सिंह की पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनकी आध्यात्मिक जिज्ञासाओं, आन्तरिक विकास–क्रम और जीवन के आधारभूत सत्यों की खोज का ब्यौरा भी पाएँगे । Dau. Karn sinh ko aadhunik bharat ke chintkon aur rajanayikon mein ek mahattvpurn sthan prapt hai. Mulat: angrezi mein prkashit ye pustak pahle do khandon mein thi. Baad mein ise ek hi jild mein sameta gaya jismen khas taur se isi sanskran ke liye likhi gai ek mahattvpurn prastavna bhi shamil thi. Ye isi ka hin‍di sanskran hai. Dau. Karn sinh ki ye ‘atmaktha’ bhartiy itihas ke ek mahattvpurn daur ka lekha–jokha prastut karti hai jismen bharat ki svtantrta–prapti ki ghatna ke alava jammu–kashmir ki rajniti, chin aur pakistan ke saath vivad aur pan. Javaharlal nehru va lalabhadur shastri ke prdhanmantritv kaal ki ghatnayen shamil hain. Is bahya ghatna–chakr ke alava is pustak mein aap dau. Karn sinh ki parivarik prishthbhumi aur unki aadhyatmik jigyasaon, aantrik vikas–kram aur jivan ke aadharbhut satyon ki khoj ka byaura bhi payenge.