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Aao Viveksheel Banein

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प्रस्तुत पुस्तक डॉ. दाभोलकर के ‘सकाळ’ अखबार में छपे स्तम्भ-लेखन का संकलन है. इसमें डॉ. दाभोलकर के पाठकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर हैं लेकिन उनका स्वरुप प्रश्न-उत्तर का नहीं है. यह पत्र-शैली के रूप में किया गया लेखन है. डॉ. दाभोलकर के मतानुसार यह एक कार्यकर्ता का लेखन... Read More

Description

प्रस्तुत पुस्तक डॉ. दाभोलकर के ‘सकाळ’ अखबार में छपे स्तम्भ-लेखन का संकलन है. इसमें डॉ. दाभोलकर के पाठकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर हैं लेकिन उनका स्वरुप प्रश्न-उत्तर का नहीं है. यह पत्र-शैली के रूप में किया गया लेखन है. डॉ. दाभोलकर के मतानुसार यह एक कार्यकर्ता का लेखन है.
प्रस्तुत पुस्तक दरअसल युवाओं से संवाद है. डॉ. दाभोलकर यह जानते थे कि परिवर्तन की आधारशिला युवक ही हैं. इसी कारण उन्होंने प्रस्तुत पुस्तक में युवाओं के मन में आनेवाले अंधविश्वास सम्बन्धी प्रश्नों का वैज्ञानिक ढंग से विवेचन प्रस्तुत किया है. पुस्तक में भूत-प्रेत, ज्योतिष,सम्मोहन, पाखंड, सत्यनारायण, मुहूर्त, वास्तुशास्त्र समारोह, जनेऊ, चमत्कार आदि को लेकर विज्ञानवादी विचार व्यक्त किये गए हैं. यह पुस्तक समाज में प्रचलित अंधविश्वासों पर एक गंभीर चिंतन है. Prastut pustak dau. Dabholkar ke ‘sakaळ’ akhbar mein chhape stambh-lekhan ka sanklan hai. Ismen dau. Dabholkar ke pathkon dvara puchhe ge prashnon ke uttar hain lekin unka svrup prashn-uttar ka nahin hai. Ye patr-shaili ke rup mein kiya gaya lekhan hai. Dau. Dabholkar ke matanusar ye ek karykarta ka lekhan hai. Prastut pustak darasal yuvaon se sanvad hai. Dau. Dabholkar ye jante the ki parivartan ki aadharashila yuvak hi hain. Isi karan unhonne prastut pustak mein yuvaon ke man mein aanevale andhvishvas sambandhi prashnon ka vaigyanik dhang se vivechan prastut kiya hai. Pustak mein bhut-pret, jyotish,sammohan, pakhand, satynarayan, muhurt, vastushastr samaroh, janeu, chamatkar aadi ko lekar vigyanvadi vichar vyakt kiye ge hain. Ye pustak samaj mein prachlit andhvishvason par ek gambhir chintan hai.