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Aakhiri Ishq Sabse Pahle Kiya

Rs. 200 Rs. 178

इस किताब में एक ऐसे शाइ’र की शाइ’री है जो शहर के बाज़ारों के बीचो-बीच अपने वजूद के सेहरा में ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं। उनकी शाइ’री से ये नुमाया होता है कि उन्होंने वक़्त को अपने जिस्म के चाक पर रखकर उससे अपनी रफ़्तार का हम-रक़्स कर दिया है। वो... Read More

Description

इस किताब में एक ऐसे शाइ’र की शाइ’री है जो शहर के बाज़ारों के बीचो-बीच अपने वजूद के सेहरा में ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं। उनकी शाइ’री से ये नुमाया होता है कि उन्होंने वक़्त को अपने जिस्म के चाक पर रखकर उससे अपनी रफ़्तार का हम-रक़्स कर दिया है। वो किसी की मदहोश बाँहों की ख़्वाहिशों के नशे में इ’श्क़ के लामुतनाही सफ़र में अपने हम-अ’सरों से काफ़ी आगे निकल आए हैं और उनकी शाइ’री को इ’श्क़ का सफ़र-नामा भी कहा जा सकता है। उनके सहराई बदन का अहाता इतना वसीअ’ है कि इ’श्क़-ओ-हवस के तमाम ज़ावियों ने इस दश्त में अपना घर कर लिया है। नो’मान शौक़ सुब्ह-ओ-शाम अपने दश्त-ए-बदन में अपने मेहबूब को सोचते और लिखते रहते हैं। Is kitab mein ek aise shai’ra ki shai’ri hai jo shahar ke bazaron ke bicho-bich apne vajud ke sehra mein zindagi guzar rahe hain. Unki shai’ri se ye numaya hota hai ki unhonne vaqt ko apne jism ke chak par rakhkar usse apni raftar ka ham-raqs kar diya hai. Vo kisi ki madhosh banhon ki khvahishon ke nashe mein i’shq ke lamutnahi safar mein apne ham-a’saron se kafi aage nikal aae hain aur unki shai’ri ko i’shq ka safar-nama bhi kaha ja sakta hai. Unke sahrai badan ka ahata itna vasia’ hai ki i’shq-o-havas ke tamam zaviyon ne is dasht mein apna ghar kar liya hai. No’man shauq subh-o-sham apne dasht-e-badan mein apne mehbub ko sochte aur likhte rahte hain.