Jidhar Se Sooraj Ugta Hai
Item Weight | 0.3 |
ISBN | 978-8189600563 |
Author | Jitendra Bhatia |
Language | Hindi |
Publisher | Sambhavna Prakashan |
Pages | 210 |
Edition | first |

Jidhar Se Sooraj Ugta Hai
यानी यात्राएँ पूर्व के ऐसे प्रदेश की, जो बहुत करीब होते हुए भी आज तक हमारे लिए अपरिचित और रहस्यमय है! सिक्किम से उत्तरी बंगाल, उत्तर-पूर्व, भूटान, बांग्लादेश और उससे आगे मयनमार तक फैला हमारे देश का पूर्वी इलाक़ा अनोखी सभ्यताओं का उदगम क्षेत्र होने के बावजूद आज भी कई रहस्यों और अनकही वर्जनाओं से घिरा हुआ प्रदेश है। इसका इतिहास, इसकी संस्कृति, इसका पर्यावरण और इसका जीवन कई अलग-अलग प्रांतों, देशों और राजनीतिक चाहरदीवारियों में बँटा होने के बावजूद एक सी सहभागिता के कई अनकहे सूत्रों में बंधा हुआ है, जिसके समूचे स्वरूप को लेकर आज तक शायद ही कभी कुछ लिखा गया होगा।
कई वर्षों के फ़ासले पर, बेतरतीब ढँग से संपन्न हुई ये यात्राएँ दूसरों से भी अधिक, स्वयं अपनी समझ में इज़ाफ़़ा करने और उस एकसूत्रता तक पहुँचने का प्रयास हैं। ये सफ़रनामे यात्रा के साथ-साथ संस्कृति और राजनीति के पूर्वाख्यान भी हैं, क्योंकि इन्हें समझे बग़ैर किसी भी यात्रा से टूरिस्ट गाइड की इकहरी समझ से ऊपर उठने की उम्मीद नहीं की जा सकती! लेकिन इस सब के बावजूद किसी खानाबदोश की सी बेचैनी से जन्मी इन यात्राओं का गणित या कि इनका कुल-जमा-हासिल तय कर पाना मुश्किल होगा।
About Author:
जितेन्द्र भाटिया जन्म : 1946 राजस्थान। स्कूल के बाद केमिकल इंजीनियरिंग में पी-एच. डी तक की सारी पढ़ाई आई. आई. टी. बम्बई से, जहाँ से विशिष्ट भूतपूर्व छात्रा का सम्मान मिला। पचास वर्ष विभिन्न निजी और सार्वजनिक संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रह चुकने के बाद अब पूर्णतः लेखन। देश-विदेश की अनेक यात्राएँ, तकनीकी अभिभाषण, आलेख और सम्मान। आठवें दशक के प्रतिनिधि कथाकार, उपन्यासकार, विचारक और अनुवादक। छह कहानी संग्रह : ‘रक्तजीवी’, ‘शहादतनामा’, ‘सिद्धार्थ का लौटना’, ‘अगले अँधेरे तक’, ‘यहाँ से शहर को देखो’ और ‘रुकावट के लिए खेद है’। तीन उपन्यास : ‘समय सीमान्त’, ‘प्रत्यक्षदर्शी’ और ‘रुणियाबास की अंतर्कथा’। दो नाटक : ‘जंगल में खुलने वाली खिड़की’ और ‘रास्ते बंद हैं’ (रूपान्तर)। चार वैचारिक पुस्तकें : ‘सदी के प्रश्न’, ‘इक्कीसवीं सदी की लड़ाइयाँ’, ‘कंक्रीट के जंगल में गुम होते शहर’ और ‘सर्जकों का प्रेक्षागृह’ (प्रकाश्य)। तीन यात्रावृत्त : ‘मयनमारः गलियों से शहर और शहर से देश को देखना’, ‘उत्तरपूर्वः जिधर से सूरज उगता है’ और ‘लातिन अमेरिका डायरी’ (प्रकाश्य)। विश्व साहित्य से अनुवाद और वैचारिक लेखमाला की मान
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