{"product_id":"tum-tumhara-ishq-aur-ye-nazmen-tum-tumhaaraa-ishk-aur-ye-nj-men","title":"TUM, TUMHARA ISHQ AUR YE NAZMEN | तुम, तुम्हारा इश्क़ और ये नज़्में","description":"\u003cdiv\u003eमानव सभ्यता और संस्कृति का आधार असल में प्रेम नामक अनुभूति ही है। किसी भी सभ्यता या समाज की उन्नति के लिए यह ज़रूरी है कि 'प्रेम' को एक उदात्त विचार और एक आधारभूत तत्व के रूप में समुचित सम्मान मिले। एक फलता-फूलता समाज 'प्रेम मूल्य' को सम्मान के साथ देखता है और वही समाज एक मज़बूत आधार पर भावनात्मक विकास के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक  विकास की तर.फ हमेशा अग्रसर रहता है। \u003c\/div\u003e\u003cdiv\u003eइस संग्रह की कविताओं में प्रस्तुत प्रेम, मूलत: स्त्री और पुरुष के मध्य लौकिक और अलौकिक प्रेम है जैसा कि मेरे पूर्ववर्ती प्रेम कविताओं के संग्रह में था। इन प्रेम कविताओं में भी स्त्री और पुरुष के प्रेम को विभिन्न कोणों से देखा गया है और उन दृश्यों को शब्दों में उतारा गया है।\u003c\/div\u003e\u003cdiv\u003e'तुम, तुम्हारा इश्.क और ये नज़्में' की कविताओं में प्रेम अपनी भरपूर संवेदनाओं और संभावनाओं के साथ अपने बा.की तत्वों के साथ अभिव्यक्त हुआ है। \u003c\/div\u003e\u003cdiv\u003e\u003c\/div\u003e\u003cdiv\u003e— अजीत पाल सिंह दैया \u003c\/div\u003e","brand":"Vera Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49114361463021,"sku":null,"price":240.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/iQiIT0rAdb.jpg?v=1765346315","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/products\/tum-tumhara-ishq-aur-ye-nazmen-tum-tumhaaraa-ishk-aur-ye-nj-men","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}