{"product_id":"sham-ki-tapri-poetry","title":"Sham Ki Tapri (Poetry)","description":"\u003cspan style=\"color: #0f1111; font-family: 'Amazon Ember', Arial, sans-serif;\"\u003e\"नसरी नज्म, शायरी की एक ऐसी विधा (सिन्फ) है जिसमें काव्यात्मक भाव, कल्पनाशीलता (तख्युल) और सौंदर्य (हुस्न) तो होता है, लेकिन उसमें बहर क़ाफ़िया-रदीफ की पाबंदियाँ नहीं होतीं। यह गद्य यानी नत्र के रूप में लिखी जाती है लेकिन उसका असर और बयानिया पूरी तरह से कवितामय यानी शायराना होता है। उर्दू-हिंदी शायरी में नसरी नज्म का तसव्वुर यूरोपीय साहित्य, ख़ास कर फ्रांसीसी और अंग्रेजी शायरी से आया। चार्ल्स बौदलेयर (Charles Baudelaire) जैसे कवियों ने 19वीं सदी में नसरी नज्में लिखी थी। उर्दू में नसरी नज्म जदीद अहद (Modernism) से प्रभावित हुई। यू समझ लीजिए के 1950\/1960 ई. के आस-पास हिंदुस्तानी शायरी में नसरी नज्म को रिवाज मिला, तब से लेकर आज तक लगभग पिछले 70 सालों खूब नसरी नज्में कहीं जाने लगी। शायरी का यह जमाना, post modern age कहलाता है यानी इन नज्मों को वक्त के साथ मजीद इस्तहकॉम (stablishment) मिलता गया। खैर यहां नसरी नज्मों की तारीख बताना मकसद नहीं है, ना ही उन तनक़ीद निगारों पर बहस करना है कि जिन्होंने इन नज्मों की ताईद या इन नज्मों पर तनक्रीद की बल्कि यहां तो 'शाम की टपरी' की मुसन्निफ़ा डॉ. कविता अरोरा की नसरी नत्मों पर बात करनां मक्रसद है।\"\u003c\/span\u003e","brand":"Bodhi Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49432661164269,"sku":null,"price":189.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/cYJa7PZkhf.jpg?v=1772443948","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/products\/sham-ki-tapri-poetry","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}