{"product_id":"sapno-se-pare-spnon-se-pre","title":"SAPNO SE PARE | सपनों से परे","description":"\u003cp dir=\"auto\" style=\"white-space-collapse: preserve;\"\u003eबृजेन्द्र अग्निहोत्री का काव्य-संग्रह \u003cem\u003eसपनों से परे\u003c\/em\u003e जीवन की उन अनछुई परतों को उकेरता है, जहाँ भावनाएँ, अनुभव और समाज की सच्चाइयाँ एक-दूसरे से गहरे संवाद में बंधती हैं। यह संग्रह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि मानव मन की गहरी खोज और सामाजिक संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज है। कवि ने अपनी रचनाओं में प्रेम, पीड़ा, आशा, और सामाजिक विडंबनाओं को इस तरह पिरोया है कि प्रत्येक कविता पाठक के अंतर्मन को झकझोरती है और उसे आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है।\u003c\/p\u003e\u003cp dir=\"auto\" style=\"white-space-collapse: preserve;\"\u003e\u003cem\u003eदूसरी दुनिया\u003c\/em\u003e और \u003cem\u003eस्त्री की अंतर्व्यथा\u003c\/em\u003e जैसी कविताएँ आत्मिक और सामाजिक आयामों को उजागर करती हैं, तो \u003cem\u003eप्यार\u003c\/em\u003e और \u003cem\u003eमुस्कान\u003c\/em\u003e प्रेम की कोमलता को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती हैं। \u003cem\u003eगंगा की पावनता\u003c\/em\u003e भारतीय संस्कृति की गहराई को छूती है, वहीं \u003cem\u003eयोजना बनाना आसान है\u003c\/em\u003e और \u003cem\u003eसमय\u003c\/em\u003e जैसी रचनाएँ आधुनिक जीवन की जटिलताओं पर तीखा कटाक्ष करती हैं। कवि की लेखनी में एक ओर जहाँ जीवन की सरलता और सौंदर्य का उत्सव है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक कुरीतियों और मानवीय कमजोरियों पर गहन चिंतन भी है।\u003c\/p\u003e\u003cp dir=\"auto\" style=\"white-space-collapse: preserve;\"\u003e\u003cem\u003eसपनों से परे\u003c\/em\u003e वह काव्य है, जो शब्दों से परे जाकर अनुभूतियों को जीवंत करता है। यह संग्रह हर उस पाठक के लिए है, जो कविता को न केवल पढ़ना चाहता है, बल्कि उसे जीना चाहता है। बृजेन्द्र अग्निहोत्री की यह कृति निश्चित रूप से हिंदी काव्य-साहित्य में एक सशक्त और संवेदनशील योगदान है।\u003c\/p\u003e","brand":"Vera Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48166444794093,"sku":"baa01","price":170.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/kPYnCqhytw.jpg?v=1748837658","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/products\/sapno-se-pare-spnon-se-pre","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}