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Paltu Babu Road

Phanishwarnath Renu

Rs. 150 Rs. 134

पल्टू बाबू रोड' अमर कथाशिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु का लघु उपन्यास है। यह उपन्यास पटना से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'ज्योत्स्ना' के दिसम्‍बर, 1959 से दिसम्‍बर, 1960 के अंकों में धारावाहिक रूप से छपा था। रेणु के निधन के बाद 1979 में पुस्तकाकार प्रकाशित हुआ। नई-नई कथाभूमियों की खोज करनेवाले रेणु 'पल्टू... Read More

Description

पल्टू बाबू रोड' अमर कथाशिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु का लघु उपन्यास है। यह उपन्यास पटना से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'ज्योत्स्ना' के दिसम्‍बर, 1959 से दिसम्‍बर, 1960 के अंकों में धारावाहिक रूप से छपा था। रेणु के निधन के बाद 1979 में पुस्तकाकार प्रकाशित हुआ।
नई-नई कथाभूमियों की खोज करनेवाले रेणु 'पल्टू बाबू रोड' में एक क़स्बे को अपनी कथा का आधार बनाते हैं। वे कठोर, विकृत और ह्रासोन्मुख समाज को लेखकीय प्रखरता के साथ परखते हैं। इस उपन्यास में रेणु अपने गाँव-इलाक़े को छोड़कर बैरगाछी क़स्बे को कथाभूमि बनाते हैं। इस क़स्बे की नियति पल्टू बाबू जैसे काइयाँ, धूर्त, कामुक बूढ़े के हाथ में है। उसने क़स्बे के लिए ऐसी राह निर्मित की है जिस पर राजनीतिज्ञ, ठेकेदार, व्यापारी, वकील (पूरे क़स्बे के लोग ही) चल रहे हैं। लगता है, क़स्बावासी शतरंज के मोहरे हैं और पल्टू बाबू इनके संचालक।
इस उपन्यास का लक्ष्य है उच्च वर्ग के अंतर्विरोधों, उसकी गिरावट, राजनीतिक और आर्थिक सम्‍बन्‍धों में यौन-व्यापार आदि का चित्रण। निम्न वर्ग छिटपुट आया है। आदर्शवादी पात्र विडम्बना से घिरे हैं। भाषा प्रवाहपूर्ण और अर्थव्यंजक है। अत्यन्त पठनीय उपन्यास। Paltu babu rod amar kathashilpi phanishvarnath renu ka laghu upanyas hai. Ye upanyas patna se prkashit masik patrika jyotsna ke disam‍bar, 1959 se disam‍bar, 1960 ke ankon mein dharavahik rup se chhapa tha. Renu ke nidhan ke baad 1979 mein pustkakar prkashit hua. Nai-nai kathabhumiyon ki khoj karnevale renu paltu babu rod mein ek qasbe ko apni katha ka aadhar banate hain. Ve kathor, vikrit aur hrasonmukh samaj ko lekhkiy prakharta ke saath parakhte hain. Is upanyas mein renu apne ganv-ilaqe ko chhodkar bairgachhi qasbe ko kathabhumi banate hain. Is qasbe ki niyati paltu babu jaise kaiyan, dhurt, kamuk budhe ke hath mein hai. Usne qasbe ke liye aisi raah nirmit ki hai jis par rajnitigya, thekedar, vyapari, vakil (pure qasbe ke log hi) chal rahe hain. Lagta hai, qasbavasi shatranj ke mohre hain aur paltu babu inke sanchalak.
Is upanyas ka lakshya hai uchch varg ke antarvirodhon, uski giravat, rajnitik aur aarthik sam‍ban‍dhon mein yaun-vyapar aadi ka chitran. Nimn varg chhitput aaya hai. Aadarshvadi patr vidambna se ghire hain. Bhasha prvahpurn aur arthavyanjak hai. Atyant pathniy upanyas.