{"product_id":"navjagran-rastravad-aur-stri-prashan","title":"Navjagran, Rastravad Aur Stri Prashan","description":"\u003cspan style=\"color: #777777; font-family: Jost, sans-serif; font-size: 16px; letter-spacing: 0.5px;\"\u003eइस पुस्तक में स्त्री-प्रश्नों के संदर्भ में नवजागरणकालीन भारत की शिनाख्त करने की कोशिश की गई है। साथ ही भारतीय समाज में मौजूद उन तत्त्वों की भी शिनाख्त की गई है जो जागरण की प्रक्रिया को गतिशील बनाए रखते हैं। गतिशीलता हरेक समाज व्यवस्था की विशेषता होती है। सबसे अनम्य व्यवस्था भी मामूली गतिशीलता से वंचित नहीं होती। सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक अराजकता के दौर में भी व्यवस्था की स्थापित ताकत को कमजोर कर, तनावों को सामने लाकर गतिशीलता को बढ़ावा देने वाली ताकत काम कर रही होती है। इस संदर्भ में कार्ल मार्क्स के मत को देखा जा सकता है। मार्क्स कहते हैं कि प्रत्येक सामाजिक व्यवस्था के गर्भ में एक नयी सामाजिक व्यवस्था मौजूद होती है; परिपक्व होकर नयी सामाजिक व्यवस्था रूढ़ हो चुकी पुरानी व्यवस्था पर बल प्रयोग करती है तो पुरानी व्यवस्था समाप्त हो जाती है और एक नयी व्यवस्था का जन्म होता है। यह गतिशील प्रक्रिया हरेक समाज व्यवस्था में कमोबेश चलती रहती है। व्यवस्था की इस गतिशीलता को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक परिवर्तन तेजी प्रदान करते हैं। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि हरेक जीवित समाज जागरण की प्रक्रिया से होकर गुजरता है; अनम्य से अनम्य समाज भी जागरण की गतिशील प्रक्रिया से अछूता नहीं रहता। इसके साथ ही नवजागरण के अखिल भारतीय स्वरूप को समझने का प्रयास किया गया है। 'प्रायः भारतीय नवजागरण को बंगाल और महाराष्ट्र तक सीमित करके संपूर्ण भारतीय नवजागरण को इन दोनों से प्रभावित बता दिया जाता है। नवजागरण के पश्चिमी मॉडल को सार्वभौम मान लेने की वजह से भारतीय नवजागरण में इटली की तर्ज पर मात्र बांग्ला नवजागरण की चर्चा होती रही या समूचे अखिल भारतीय नवजागरण को बांग्ला नवजागरण तक सीमित करके देखा-परखा गया।\u003c\/span\u003e","brand":"Nayee Kitab Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49420017008877,"sku":"Sudhanshu Kumar","price":630.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/pYUFsBznM0.jpg?v=1772255002","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/products\/navjagran-rastravad-aur-stri-prashan","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}