{"product_id":"nalin-vilochan-sharma-pratinidhi-nibandh","title":"Nalin Vilochan Sharma : Pratinidhi Nibandh","description":"\u003cspan style=\"color: #777777; font-family: Jost, sans-serif; font-size: 16px; letter-spacing: 0.5px;\"\u003eहिन्दी आलोचना में आचार्य नलिन विलोचन शर्मा का प्रवेश आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अवसान के बाद होता है। आचार्य शुक्ल की समीक्षा चौथे दशक में पूर्ण होती है और आचार्य नलिन विलोचन शर्मा की शुरुआत इसी दशक से होती है। यह दशक अनेक दृष्टियों से देश और दुनिया में महत्त्वपूर्ण था। द्वितीय विश्वयुद्ध की विभीषिका और स्वतंत्रता आंदोलन का जो स्वस्थ अस्वस्थ प्रभाव पड़ रहा था उससे हिन्दी साहित्य भी अछूता नहीं था। मार्क्सवाद, फ्रायडवाद, अस्तित्ववाद, गाँधीवाद और समाजवाद आदि देश-दुनिया के ज्ञान और दर्शन की प्रमुख धाराएँ थीं जिसका प्रभाव बुद्धिजीवियों पर पड़ना स्वाभाविक है, नलिन जी पर भी इन विचारों का प्रभाव पड़ा। भारतीय सन्दर्भ में देखें तो, नेहरू और नलिन दोनों आधुनिकता के प्रबल प्रवक्ता थे, लेकिन परम्परा के उतने ही गहरे जानकार भी। पहले ने भारतीय राजनीति में आधुनिकता का सफल प्रयोग किया, तब दूसरे ने साहित्य में। पूरी दुनिया सोवियत संघ और अमेरिका दो खेमों में बँटी हुई थी। गुटनिरपेक्ष आन्दोलन, इस शिविरबद्धता के विरुद्ध, जिस तरह तीसरे विकल्प की खोज था, उसी तरह नलिन जी की आलोचना प्रगतिवाद बनाम आधुनिकता के विवाद से अलग आलोचना के तीसरे धरातल की खोज है। शिविरबद्धता के विरुद्ध उनका आलोचनात्मक संघर्ष था। वे हिन्दी साहित्य में गुटनिरपेक्ष थे, जो प्रगतिवादी और प्रयोगवादी, दोनों शिविरों के प्रति समान रूप से कठोर था। नलिन जी एक ओर जहाँ मार्क्सवादी रूढ़ि में फँस जाने के लिए प्रगतिवादियों की कड़ी आलोचना कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर अज्ञेय और उनकी मंडली को वास्तविक प्रयोगवादी मानने से इंकार कर रहे थे। अज्ञेय जी के समानान्तर उन्होंने प्रपद्यवाद की एक नई धारा का सूत्रपात किया था और उनकी स्पर्धा में उभरकर सामने आए थे। दिलचस्प संयोग है कि नलिन जी के मकान का नाम 'त्रिशंकु' था और अज्ञेय के प्रसिद्ध निबन्ध संग्रह का नाम भी 'त्रिशंकु' है। अज्ञेय जी के साथ उनकी मौन मुलाकात के संस्मरण तो लोग किंवदंतियों की तरह सुनाते हैं। अज्ञेय जी उनसे मिलने गए तो देर तक दोनों के बीच चुप्पी रही। अज्ञेय जी ने पूछा, 'कैसे\u003c\/span\u003e","brand":"Nayee Kitab Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49420530647277,"sku":"Ajay anand","price":495.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/e0RsIMMpVV.jpg?v=1772265584","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/products\/nalin-vilochan-sharma-pratinidhi-nibandh","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}