{"product_id":"maun-ka-samwad-मौन-का-संवाद","title":"Maun Ka Samwad | मौन का संवाद","description":"\u003cp dir=\"auto\" style=\"white-space: pre-wrap;\"\u003e‘मौन का संवाद’ की कविताएँ समकालीन जीवन के विविध आयामों को अत्यंत सूक्ष्मता और संवेदनशीलता के साथ स्पर्श करती हैं। आधुनिक युग की विडंबनाएँ, संबंधों की जटिलताएँ और व्यक्तित्व के भीतर उत्पन्न होने वाले द्वंद्व — ये सभी इस संग्रह में अपनी पूरी गहराई के साथ उपस्थित हैं। ‘निकट का अजनबी’ और ‘ब्लू टिक के पार’ जैसे शीर्षक आज के तकनीकी युग की उस त्रासदी को उजागर करते हैं, जहाँ भौतिक दूरी भले ही समाप्त हो गई हो, पर भावनात्मक दूरी निरंतर बढ़ती जा रही है। मनुष्य एक-दूसरे के जीवन में उपस्थित तो है, किंतु उसकी उपस्थिति केवल औपचारिक रह गई है; संवाद का स्थान सूचनाओं ने ले लिया है, और आत्मीयता का स्थान ‘उपस्थिति के संकेतों’ ने। इन कविताओं में यह प्रश्न बार-बार उभरता है कि क्या वास्तव में हम संवाद कर रहे हैं, या केवल संवाद का भ्रम जी रहे हैं? ‘ब्लू टिक’ यहाँ एक प्रतीक बनकर सामने आता है — एक ऐसा प्रतीक, जो उत्तर मिलने का आश्वासन देता है, किंतु अक्सर भीतर के प्रश्नों को और अधिक गहरा कर देता है। इसी प्रकार ‘निकट का अजनबी’ उस विडंबना को रेखांकित करता है, जहाँ हमारे सबसे निकट रहने वाले लोग भी कभी-कभी हमारे लिए अपरिचित हो जाते हैं। इसके विपरीत, ‘माँ का चाँद’ और ‘हर चेहरे में एक फूल’ जैसी कविताएँ इस संग्रह के संवेदनात्मक पक्ष को उजागर करती हैं। ये कविताएँ जीवन की उस कोमलता और सहजता को स्पर्श करती हैं, जहाँ प्रेम किसी तर्क का विषय नहीं होता, बल्कि एक स्वाभाविक अनुभूति के रूप में उपस्थित रहता है। ‘हर चेहरे में एक फूल’ मनुष्य के भीतर निहित सौंदर्य और संभावनाओं को देखने की दृष्टि प्रदान करती है — एक ऐसी दृष्टि, जो बाह्य रूपों से परे जाकर भीतर की कोमलता को पहचानती है। इन कविताओं के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि जीवन केवल जटिलताओं और विडंबनाओं का समुच्चय नहीं है; उसमें संवेदना, प्रेम और आशा के सूक्ष्म किंतु सशक्त तंतु भी जुड़े हुए हैं। ‘मौन का संवाद’ इन्हीं तंतुओं को जोड़कर एक ऐसी काव्यात्मक संरचना निर्मित करता है, जिसमें आधुनिकता की कठोरता और मानवीयता की कोमलता — दोनों का संतुलित समावेश है।\u003c\/p\u003e","brand":"Vera Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50124880281837,"sku":null,"price":190.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/5wOuFP8C2k.jpg?v=1781873431","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/products\/maun-ka-samwad-%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}