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Ishwar Ki Kahaniyan

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नई शैली में नई बात कहने के लिए ईश्वर की कहानियाँ साहित्य की दुनिया में चर्चित हैं। लेकिन इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि ये कहानियाँ जहाँ भी छपी हैं, इन्हें पाठकों ने पसन्द किया है। इन पाठकों में बच्चे से लेकर बूढ़े तक सभी शामिल हैं। अपने ही... Read More

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Description

नई शैली में नई बात कहने के लिए ईश्वर की कहानियाँ साहित्य की दुनिया में चर्चित हैं। लेकिन इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि ये कहानियाँ जहाँ भी छपी हैं, इन्हें पाठकों ने पसन्द किया है। इन पाठकों में बच्चे से लेकर बूढ़े तक सभी शामिल हैं। अपने ही ढंग की इन छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से हर पाठक अपने आसपास बिखरे यथार्थ के व्यंग्य को समझ सकता है। ये पाठक की कल्पनाशीलता को भी उर्वर करती हैं और वह अपने भीतर छिपी ऐसी तमाम कहानियों को ख़ुद गढ़ना शुरू कर देता है।
पाठक की कल्पना को इस तरह जाग्रत् करनेवाली रचनाएँ दुर्भाग्य से हमारे साहित्य में अधिक नहीं हैं। ईश्वर तो दरअसल यथार्थ को खोलने-उधेड़ने-जाँचने का बहाना है। लेकिन इस बहाने के बग़ैर यथार्थ के अनेक पक्ष प्रभावशाली ढंग से उद्घाटित भी नहीं हो पाते। पहली बार इस पुस्तक में अभी तक प्रकाशित ईश्वर की सभी कहानियाँ एक साथ संकलित हैं। Nai shaili mein nai baat kahne ke liye iishvar ki kahaniyan sahitya ki duniya mein charchit hain. Lekin isse bhi mahattvpurn baat ye hai ki ye kahaniyan jahan bhi chhapi hain, inhen pathkon ne pasand kiya hai. In pathkon mein bachche se lekar budhe tak sabhi shamil hain. Apne hi dhang ki in chhoti-chhoti kahaniyon ke madhyam se har pathak apne aaspas bikhre yatharth ke vyangya ko samajh sakta hai. Ye pathak ki kalpnashilta ko bhi urvar karti hain aur vah apne bhitar chhipi aisi tamam kahaniyon ko khud gadhna shuru kar deta hai. Pathak ki kalpna ko is tarah jagrat karnevali rachnayen durbhagya se hamare sahitya mein adhik nahin hain. Iishvar to darasal yatharth ko kholne-udhedne-janchane ka bahana hai. Lekin is bahane ke bagair yatharth ke anek paksh prbhavshali dhang se udghatit bhi nahin ho pate. Pahli baar is pustak mein abhi tak prkashit iishvar ki sabhi kahaniyan ek saath sanklit hain.