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Harf-E-Awara

Rs. 395

बहुत से लोग हैं जो अपने आपको लफ़्ज़ देने के लिए शा'इरी इख़्तियार करते हैं मगर कुछ ख़ुशक़िस्मत ऐसे भी हैं जिन्हें ख़ुद शा'इरी अपने आपको ज़ाहिर करने के लिए चुनती है। अभिषेक उन्हीं चन्द ख़ुशक़िस्मतों में शामिल हैं जिन्हें शा'इरी ने इस ज़माने में अपना तर्जुमान मुक़र्रर किया है।... Read More

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Description

बहुत से लोग हैं जो अपने आपको लफ़्ज़ देने के लिए शा'इरी इख़्तियार करते हैं मगर कुछ ख़ुशक़िस्मत ऐसे भी हैं जिन्हें ख़ुद शा'इरी अपने आपको ज़ाहिर करने के लिए चुनती है। अभिषेक उन्हीं चन्द ख़ुशक़िस्मतों में शामिल हैं जिन्हें शा'इरी ने इस ज़माने में अपना तर्जुमान मुक़र्रर किया है। ख़ामोशी अभिषेक की शा'इरी की जन्मभूमि है। उसके पास से ख़ामोशी की ख़ुशबू और आँच आती है कि उसके अन्दर तज्रबों का एक आतिशख़ाना है जो एक बाग़ की तरह खिला हुआ है। ख़ामोशी उसका चाक भी है जिस पर वो लफ़्ज़ों की कच्ची मिट्टी से मा'नी की शक्लें बनाता है। अभिषेक ने ये मिट्टी अपनी ज़ात और ज़माने के जिस्म और रूह के तज्रबों को गूँधकर तैयार की है। ये मिट्टी उसकी अपनी है और उससे बनाई जानेवाली सूरतें भी।
—फ़रहत एहसास Bahut se log hain jo apne aapko lafz dene ke liye shairi ikhtiyar karte hain magar kuchh khushqismat aise bhi hain jinhen khud shairi apne aapko zahir karne ke liye chunti hai. Abhishek unhin chand khushqismton mein shamil hain jinhen shairi ne is zamane mein apna tarjuman muqarrar kiya hai. Khamoshi abhishek ki shairi ki janmbhumi hai. Uske paas se khamoshi ki khushbu aur aanch aati hai ki uske andar tajrbon ka ek aatishkhana hai jo ek baag ki tarah khila hua hai. Khamoshi uska chak bhi hai jis par vo lafzon ki kachchi mitti se mani ki shaklen banata hai. Abhishek ne ye mitti apni zaat aur zamane ke jism aur ruh ke tajrbon ko gundhakar taiyar ki hai. Ye mitti uski apni hai aur usse banai janevali surten bhi. —farhat ehsas