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‘‘रुचि बराबर क़ायम रहती है, जो सफलता का बड़ा प्रमाण है। ऐतिहासिक विषय के साथ न्याय किया गया है, उपन्यास की माँग को निबाहते हुए भी। यह क्षमता रचना से सिद्ध होती है।’’ —जैनेन्द्र कुमार ‘‘किसी अच्छी रचना का पहला गुण सम्प्रेषणीयता होती है, वह इसमें है। निरन्तर आगे पढ़ते... Read More

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Description

‘‘रुचि बराबर क़ायम रहती है, जो सफलता का बड़ा प्रमाण है। ऐतिहासिक विषय के साथ न्याय किया गया है, उपन्यास की माँग को निबाहते हुए भी। यह क्षमता रचना से सिद्ध होती है।’’
—जैनेन्द्र कुमार
‘‘किसी अच्छी रचना का पहला गुण सम्प्रेषणीयता होती है, वह इसमें है। निरन्तर आगे पढ़ते रहने की उत्सुकता बनी रहती है। उस युग का वातावरण प्रामाणिक लगता है। कहानी का ढंग आकर्षक है। जो चरित्र निर्मित हुए हैं, वे भी विश्वसनीय लगते हैं। अबू-छंगी, इनू-सलमा की कहानियाँ अधिक प्रामाणिक बन गई हैं। चरित्र की दृष्टि से सलमा सर्वोत्तम है। पढ़ने में मन रमता है। कहानी कहने के ढंग से रोचकता बढ़ गई है।’’
—विष्णु प्रभाकर
‘‘उपन्यास के बुनने में बड़ा परिश्रम किया है। और इसकी अन्तर-कथाओं के ताने-बाने बड़े कौशल से तैयार किए गए हैं। भाषा को भी सँवारा है।’’
—शिवमंगलसिंह ‘सुमन’ ‘‘ruchi barabar qayam rahti hai, jo saphalta ka bada prman hai. Aitihasik vishay ke saath nyay kiya gaya hai, upanyas ki mang ko nibahte hue bhi. Ye kshamta rachna se siddh hoti hai. ’’—jainendr kumar
‘‘kisi achchhi rachna ka pahla gun sampreshniyta hoti hai, vah ismen hai. Nirantar aage padhte rahne ki utsukta bani rahti hai. Us yug ka vatavran pramanik lagta hai. Kahani ka dhang aakarshak hai. Jo charitr nirmit hue hain, ve bhi vishvasniy lagte hain. Abu-chhangi, inu-salma ki kahaniyan adhik pramanik ban gai hain. Charitr ki drishti se salma sarvottam hai. Padhne mein man ramta hai. Kahani kahne ke dhang se rochakta badh gai hai. ’’
—vishnu prbhakar
‘‘upanyas ke bunne mein bada parishram kiya hai. Aur iski antar-kathaon ke tane-bane bade kaushal se taiyar kiye ge hain. Bhasha ko bhi sanvara hai. ’’
—shivmangalsinh ‘suman’