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Gandhi Ji Bole Theiy

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मॉरिशस के सुप्रसिद्ध हिन्दी कथाकार अभिमन्यु अनत का यह उपन्यास उनकी बहुचर्चित कथाकृति ‘लाल पसीना’ की अगली कड़ी है। ‘लाल पसीना’ मॉरिशस की धरती पर प्रवासी भारतीयों की शोषणग्रस्त ज़िन्दगी के अनेकानेक अँधेरों का दर्दनाक दस्तावेज़ है, लेकिन इस उपन्यास में हम उसी ज़िन्दगी और उन अँधेरों से चेतना का... Read More

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Description

मॉरिशस के सुप्रसिद्ध हिन्दी कथाकार अभिमन्यु अनत का यह उपन्यास उनकी बहुचर्चित कथाकृति ‘लाल पसीना’ की अगली कड़ी है। ‘लाल पसीना’ मॉरिशस की धरती पर प्रवासी भारतीयों की शोषणग्रस्त ज़िन्दगी के अनेकानेक अँधेरों का दर्दनाक दस्तावेज़ है, लेकिन इस उपन्यास में हम उसी ज़िन्दगी और उन अँधेरों से चेतना का एक नया सूर्योदय होता हुआ देखते हैं।
हज़ारों-हज़ार शोषित मज़दूर-किसानों के बीच होनेवाला यह सूर्योदय शिक्षा, संगठन और संघर्ष का प्रतीक है और इसी का मूर्त रूप है उपन्यास का नायक ‘परकाश’। शैशव में उसने दक्षिण अफ़्रीका से भारत लौट रहे गांधीजी को सुना था। उन्हीं के आदर्श से वह प्रेरित है—अन्याय के अस्वीकार के लिए शिक्षा और राजनीति का स्वीकार तथा मानवोचित अधिकारों की प्राप्ति के लिए संगठन और संघर्ष।
इस अन्तर्वस्तु को उजागर करने के क्रम में लेखक ने जिस वातावरण, घटनाओं और चरित्रों की सृष्टि की है, वह अविस्मरणीय है। आज से सत्तर-अस्सी वर्ष पूर्व के मॉरिशसीय समाज में भारतीयों की जो स्थिति थी—मर्मान्तक ग़रीबी के बीच अपनी ही बहुविध जड़ताओं और गौरांग सत्ताधीशों से उनका जो दोहरा संघर्ष था—उसे उसकी समग्रता में हम यहाँ बखूबी महसूस करते हैं। मदन, परकाश, सीता, मीरा, सीमा आदि इस उपन्यास के ऐसे पात्र हैं, जिनके विचार, संकल्प, श्रम, त्याग और प्रेम-सम्बन्ध उच्च मानवीय आदर्शों की स्थापना करते हैं और जो किसी भी संक्रमणशील जाति के प्रेरणास्रोत हो सकते हैं। Maurishas ke suprsiddh hindi kathakar abhimanyu anat ka ye upanyas unki bahucharchit kathakriti ‘lal pasina’ ki agli kadi hai. ‘lal pasina’ maurishas ki dharti par prvasi bhartiyon ki shoshnagrast zindagi ke anekanek andheron ka dardnak dastavez hai, lekin is upanyas mein hum usi zindagi aur un andheron se chetna ka ek naya suryoday hota hua dekhte hain. Hazaron-hazar shoshit mazdur-kisanon ke bich honevala ye suryoday shiksha, sangthan aur sangharsh ka prtik hai aur isi ka murt rup hai upanyas ka nayak ‘parkash’. Shaishav mein usne dakshin afrika se bharat laut rahe gandhiji ko suna tha. Unhin ke aadarsh se vah prerit hai—anyay ke asvikar ke liye shiksha aur rajniti ka svikar tatha manvochit adhikaron ki prapti ke liye sangthan aur sangharsh.
Is antarvastu ko ujagar karne ke kram mein lekhak ne jis vatavran, ghatnaon aur charitron ki srishti ki hai, vah avismarniy hai. Aaj se sattar-assi varsh purv ke maurishsiy samaj mein bhartiyon ki jo sthiti thi—marmantak garibi ke bich apni hi bahuvidh jadtaon aur gaurang sattadhishon se unka jo dohra sangharsh tha—use uski samagrta mein hum yahan bakhubi mahsus karte hain. Madan, parkash, sita, mira, sima aadi is upanyas ke aise patr hain, jinke vichar, sankalp, shram, tyag aur prem-sambandh uchch manviy aadarshon ki sthapna karte hain aur jo kisi bhi sankramanshil jati ke prernasrot ho sakte hain.