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Ek Koi Dooshra

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एक कोई दूसरा उषा प्रियंवदा की इन कहानियों को पढ़ना भाषा की एक समतल, शान्त और काँच-सी पारदर्शी सतह पर चलना है। यह सतह अपनी स्वच्छता से हमें आश्वस्ति देती है। लेकिन यह सब भाषा तक ही सीमित है; भाषा के भीतर जो कहानी होती है, वह बेहद बेचैन कर... Read More

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Description

एक कोई दूसरा उषा प्रियंवदा की इन कहानियों को पढ़ना भाषा की एक समतल, शान्त और काँच-सी पारदर्शी सतह पर चलना है। यह सतह अपनी स्वच्छता से हमें आश्वस्ति देती है। लेकिन यह सब भाषा तक ही सीमित है; भाषा के भीतर जो कहानी होती है, वह बेहद बेचैन कर देने वाली है। इन कहानियों को पढ़ते हुए हम एक ऐसे पाठ से गुज़रते हैं जो हमें लगातार सम्पूर्ण का आभास कराता हुआ, एक अधूरी, अतृप्त ज़िन्दगी की कसक साथ-साथ देता चलता है। एक कोई दूसरा की नीलांजना, झूठा दर्पण की अमृता कोई नहीं की नमिता, सागर पार का संगीत की देवयानी, पिघलती हुई बर्फ़ के अक्षय और छवि, चाँदनी में बर्फ़ पर के हेम और मीरा (मेरी) और टूटे हुए की तंत्री त्रिपाठी उर्फ़ टीटी - ये सब पात्र इस भाषा की बर्फ़ की-सी चमकती सतह के नीचे एक अधूरा और यातनाप्रद जीवन जी रहे हैं। अपने देश की मिट्टी से उखड़कर बाहर किसी सम्पन्न और पराए मुल्क में ‘अकेला’ और ‘अलग होकर’ रहना इस यंत्रणा का एक विशिष्ट पहलू है जिसको ये कहानियाँ लगातार रेखांकित करती हैं। Ek koi dusra usha priyanvda ki in kahaniyon ko padhna bhasha ki ek samtal, shant aur kanch-si pardarshi satah par chalna hai. Ye satah apni svachchhta se hamein aashvasti deti hai. Lekin ye sab bhasha tak hi simit hai; bhasha ke bhitar jo kahani hoti hai, vah behad bechain kar dene vali hai. In kahaniyon ko padhte hue hum ek aise path se guzarte hain jo hamein lagatar sampurn ka aabhas karata hua, ek adhuri, atript zindagi ki kasak sath-sath deta chalta hai. Ek koi dusra ki nilanjna, jhutha darpan ki amrita koi nahin ki namita, sagar paar ka sangit ki devyani, pighalti hui barf ke akshay aur chhavi, chandani mein barf par ke hem aur mira (meri) aur tute hue ki tantri tripathi urf titi - ye sab patr is bhasha ki barf ki-si chamakti satah ke niche ek adhura aur yatnaprad jivan ji rahe hain. Apne desh ki mitti se ukhadkar bahar kisi sampann aur paraye mulk mein ‘akela’ aur ‘alag hokar’ rahna is yantrna ka ek vishisht pahlu hai jisko ye kahaniyan lagatar rekhankit karti hain.