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Door Durgam Durust : Purvgrahon Ke Paar Purvottar Ki Yatra

Rs. 599 Rs. 533

‘दूर दुर्गम दुरुस्त’ दरअसल पूर्वोत्तर से जुड़ी यात्राओं की एक दस्तावेज़ है। इसे आप एक घुमक्कड़ की मनकही भी कह सकते हैं जो अक्सर अनकही रह जाती है। मुख्यधारा में पूर्वोत्तर की जितनी भी चर्चा होती है, उसमें उसके दुर्गम भूगोल की चीख़-पुकार ही शामिल रहती हैं। यह किताब उनसे... Read More

Description

‘दूर दुर्गम दुरुस्त’ दरअसल पूर्वोत्तर से जुड़ी यात्राओं की एक दस्तावेज़ है। इसे आप एक घुमक्कड़ की मनकही भी कह सकते हैं जो अक्सर अनकही रह जाती है। मुख्यधारा में पूर्वोत्तर की जितनी भी चर्चा होती है, उसमें उसके दुर्गम भूगोल की चीख़-पुकार ही शामिल रहती हैं। यह किताब उनसे विलग उन आहटों को सुनने की कोशिश है जो कहीं दबकर रह जाती हैं। इस किताब में मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर के कुछ हिस्सों में की गई यात्राओं के वृत्तान्त हैं। जगहों और लोगों की कहानियाँ हैं। पूर्वोत्तर में भटकता एक यात्री मन, देखने और सुनने से एक क़दम आगे बढ़कर महसूस करने की ललक में जो कुछ समेट सका है, उसकी शाब्दिक यात्रा है यह किताब! ‘dur durgam durust’ darasal purvottar se judi yatraon ki ek dastavez hai. Ise aap ek ghumakkad ki manakhi bhi kah sakte hain jo aksar anakhi rah jati hai. Mukhydhara mein purvottar ki jitni bhi charcha hoti hai, usmen uske durgam bhugol ki chikh-pukar hi shamil rahti hain. Ye kitab unse vilag un aahton ko sunne ki koshish hai jo kahin dabkar rah jati hain. Is kitab mein meghalay, asam, arunachal prdesh, nagalaind aur manipur ke kuchh hisson mein ki gai yatraon ke vrittant hain. Jaghon aur logon ki kahaniyan hain. Purvottar mein bhatakta ek yatri man, dekhne aur sunne se ek qadam aage badhkar mahsus karne ki lalak mein jo kuchh samet saka hai, uski shabdik yatra hai ye kitab!

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