BackBack
-11%

Do Vyangya Natak

Rs. 350 Rs. 312

शरद जोशी हिन्दी व्यंग्य साहित्य के श्रेष्ठ सृजकों में से एक हैं। साहित्य की रचनात्मक मूल्यवत्ता के प्रति सतत जागरूक रहकर अपने परिवेश, जीवन और समाज की हर छोटी-बड़ी विसंगति को उघाड़ने और उसके मूल पर चोट करने में उन्होंने कहीं चूक नहीं की। प्रस्तुत पुस्तक में शरद जी के... Read More

BlackBlack
Description

शरद जोशी हिन्दी व्यंग्य साहित्य के श्रेष्ठ सृजकों में से एक हैं। साहित्य की रचनात्मक मूल्यवत्ता के प्रति सतत जागरूक रहकर अपने परिवेश, जीवन और समाज की हर छोटी-बड़ी विसंगति को उघाड़ने और उसके मूल पर चोट करने में उन्होंने कहीं चूक नहीं की।
प्रस्तुत पुस्तक में शरद जी के दो व्यंग्य नाटक संगृहीत हैं—‘अन्धों का हाथी’ तथा ‘एक था गधा उर्फ़ अलादाद ख़ाँ।’ दोनों ही नाटक समकालीन राजनीतिक परिदृश्य को प्रस्तुत करने के साथ-साथ राजनीति की अविच्छिन्न अन्तर्धारा और वृत्तियों से गहरा परिचय कराते हैं। एक ओर जनसामान्य तो दूसरी ओर जन-विशेष। सामान्यजन को मूर्ख बनाए रखने तथा इस्तेमाल करते रहने का एक अन्तहीन दुश्चक्र राजनीति का स्वभाव, शौक़, ज़रूरत या कहें कि उसका मौलिक अधिकार है—विडम्बना यह कि वह भी कर्तव्यों की शक्ल में।
राजनीति के तहत सतत घट रही इस मूल्यहंता त्रासदी की गहरी पकड़ इन नाटकों में मौजूद है। लेखक ने सहज अभिनेय नाट्य-शिल्प और सुपाठ्य भाषा-शैली के सहारे अपूर्व व्यंग्यात्मक वस्तु का निर्वाह किया है। Sharad joshi hindi vyangya sahitya ke shreshth srijkon mein se ek hain. Sahitya ki rachnatmak mulyvatta ke prati satat jagruk rahkar apne parivesh, jivan aur samaj ki har chhoti-badi visangati ko ughadne aur uske mul par chot karne mein unhonne kahin chuk nahin ki. Prastut pustak mein sharad ji ke do vyangya natak sangrihit hain—‘andhon ka hathi’ tatha ‘ek tha gadha urf aladad khan. ’ donon hi natak samkalin rajnitik paridrishya ko prastut karne ke sath-sath rajniti ki avichchhinn antardhara aur vrittiyon se gahra parichay karate hain. Ek or jansamanya to dusri or jan-vishesh. Samanyjan ko murkh banaye rakhne tatha istemal karte rahne ka ek anthin dushchakr rajniti ka svbhav, shauq, zarurat ya kahen ki uska maulik adhikar hai—vidambna ye ki vah bhi kartavyon ki shakl mein.
Rajniti ke tahat satat ghat rahi is mulyhanta trasdi ki gahri pakad in natkon mein maujud hai. Lekhak ne sahaj abhiney natya-shilp aur supathya bhasha-shaili ke sahare apurv vyangyatmak vastu ka nirvah kiya hai.

Additional Information
Color

Black

Publisher
Language
ISBN
Pages
Publishing Year