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Dil Ki Duniyan

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इस्मत चुग़ताई भारतीय साहित्य में वो आवाज़ हैं जिसने अपने ज़माने में बनती हुई प्रगतिशीलता को अपनी कहानियों और उपन्यासों से एक चेहरा दिया, उसे अवाम के समझने और अपनाने लायक़ बनाया। अपने किरदारों के माध्यम से उन्होंने उस हिम्मत को साकार किया, जो कम-से-कम उनके दौर में तो स्त्रियों... Read More

Description

इस्मत चुग़ताई भारतीय साहित्य में वो आवाज़ हैं जिसने अपने ज़माने में बनती हुई प्रगतिशीलता को अपनी कहानियों और उपन्यासों से एक चेहरा दिया, उसे अवाम के समझने और अपनाने लायक़ बनाया। अपने किरदारों के माध्यम से उन्होंने उस हिम्मत को साकार किया, जो कम-से-कम उनके दौर में तो स्त्रियों के लिए एक दिवास्वप्न ही थी।
अपनी क़लम की एक-एक जुम्बिश से सौ-सौ जादू जगानेवाली इस्मत चुग़ताई ने अपने इस उपन्यास में समाज की मुर्दा और सड़ी-गली परम्पराओं से आज़ाद होकर ‘दिल की दुनिया' आबाद की है—यह एक युवती की कहानी है जिसे शादी के बाद शौहर ने छोड़ दिया था। मज़हब और समाज की ग़लत मान्यताओं के दरमियान जिसे रास्ता न सूझता था लेकिन जिसने अपनी ही जैसी एक बदनसीब ज़िन्दगी से हौसला पाकर अपने चारों तरफ़ एक आभामंडल बुन दिया। Ismat chugtai bhartiy sahitya mein vo aavaz hain jisne apne zamane mein banti hui pragatishilta ko apni kahaniyon aur upanyason se ek chehra diya, use avam ke samajhne aur apnane layaq banaya. Apne kirdaron ke madhyam se unhonne us himmat ko sakar kiya, jo kam-se-kam unke daur mein to striyon ke liye ek divasvapn hi thi. Apni qalam ki ek-ek jumbish se sau-sau jadu jaganevali ismat chugtai ne apne is upanyas mein samaj ki murda aur sadi-gali parampraon se aazad hokar ‘dil ki duniya aabad ki hai—yah ek yuvti ki kahani hai jise shadi ke baad shauhar ne chhod diya tha. Mazhab aur samaj ki galat manytaon ke daramiyan jise rasta na sujhta tha lekin jisne apni hi jaisi ek badansib zindagi se hausla pakar apne charon taraf ek aabhamandal bun diya.