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Charu Chandralekh

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चारु चन्द्रलेख आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की कलम से निकली हुई एक गहन संवेद्य कृति है। इसमें 12वीं-13वीं सदी के भारत का व्यक्ति और समाज बारीकी से व्यक्त हुआ है। समय के उस दौर में देश के लिए विदेशी आक्रमण का प्रतिरोध एक बड़ी चुनौती का दायित्व था लेकिन देश की... Read More

Description

चारु चन्द्रलेख आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की कलम से निकली हुई एक गहन संवेद्य कृति है। इसमें 12वीं-13वीं सदी के भारत का व्यक्ति और समाज बारीकी से व्यक्त हुआ है।
समय के उस दौर में देश के लिए विदेशी आक्रमण का प्रतिरोध एक बड़ी चुनौती का दायित्व था लेकिन देश की समूची आध्यात्मिक तथा इतर शक्तियाँ पुरातन अन्धविश्वास के रास्ते नष्ट हो रही थीं। ऐसे में समाज के पुनर्गठन का काम पूरी तरह से उपेक्षित था और नए मूल्यों के सृजन की जरूरत की अनदेखी हो रही थी। Charu chandrlekh aacharya hajariprsad dvivedi ki kalam se nikli hui ek gahan sanvedya kriti hai. Ismen 12vin-13vin sadi ke bharat ka vyakti aur samaj bariki se vyakt hua hai. Samay ke us daur mein desh ke liye videshi aakrman ka pratirodh ek badi chunauti ka dayitv tha lekin desh ki samuchi aadhyatmik tatha itar shaktiyan puratan andhvishvas ke raste nasht ho rahi thin. Aise mein samaj ke punargthan ka kaam puri tarah se upekshit tha aur ne mulyon ke srijan ki jarurat ki andekhi ho rahi thi.