{"product_id":"bahan-ki-diary","title":"Bahan Ki Diary","description":"\u003cspan style=\"color: #777777; font-family: Jost, sans-serif; font-size: 16px; letter-spacing: 0.5px;\"\u003eअभी रात के लगभग दो बज रहे हैं। दिल्ली की सड़कें लैम्प पोस्ट की रौशनी में सिमटीं है। तेज़ आवाज़ के साथ भागती इक्का-दुक्का गाड़ियों की चीख से सुनसान सड़के एकाएक लड़खड़ा जाती है। लैम्प की पीली रौशनी में मोमीन ने पुल के नीचे खड़े हो बीड़ी जलाई थी। माचीस के लौ से उसके सख़्त चेहरे पर हल्की सी तपीस हो आयी है। धुएँ के साथ उसने पुल के उस पार सड़क किनारे एक पुरानी टैक्सी से दो लोगों को निकल कर अपनी तरफ रोड क्रॉस कर आते देखा था। धुंधली छाया जब धीरे-धीरे पास आयी तो दोनों ने मोमीन की तरफ एक साथ हाथ आगे बढ़ाया। मोमीन ने भी दोनों को हल्की रौशनी में गौर से पहचाने की कोशिश करता, हाथ बढ़ाता, कुछ कदम आगे बढ़ गया है। दोनों मुलाकातियों ने अपना नाम 'प' और 'त' बताया, सुनकर मोमीन ने सिर्फ अपना सिर हिलाया है। दोनों की उम्र लगभग पचास के आस-पास रही होगी। 'त' देखने में 'प' से ज्यादा लम्बा और तगड़ा था। ठंड अभी उतनी नहीं थी। जिसमें की गर्म कपड़ों की ज़रूरत पड़े। फिर भी दोनों ने काले और पीले रंग की जैकेट पहन रखी थी।\u003c\/span\u003e","brand":"Nayee Kitab Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49420347244781,"sku":"Rakesh Rai","price":135.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0355\/1415\/5141\/files\/qoqGu7ITCR.png?v=1772260164","url":"https:\/\/rekhtabooks.com\/products\/bahan-ki-diary","provider":"Rekhta Books","version":"1.0","type":"link"}