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Badi Buajee

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इस नाटक की मुख्य शक्ति इसके चुटीले और व्यंग्य सिद्ध संवाद हैं। कथा का विकास और प्रवाह संवादों के जरिए होता रहता है। एक उदाहरण, बूआजी के व्यक्तित्व को व्यंजित करता शशांक नामक पात्र का यह कथन, ‘कोन्नगर से बूआजी को प्रमीला कैसे खींचकर यहाँ ला रही है, यह या... Read More

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Vendor: Rajkamal Categories: Rajkamal Prakashan Books Tags: Play
Description

इस नाटक की मुख्य शक्ति इसके चुटीले और व्यंग्य सिद्ध संवाद हैं। कथा का विकास और प्रवाह संवादों के जरिए होता रहता है। एक उदाहरण, बूआजी के व्यक्तित्व को व्यंजित करता शशांक नामक पात्र का यह कथन, ‘कोन्नगर से बूआजी को प्रमीला कैसे खींचकर यहाँ ला रही है, यह या तो भगवान जाने या तुम...यह खबर सुनने के बाद से मेरे तो होश फाख्ता हो रहे हैं। गोली खाकर मरने के समय आँखों के सामने अँधेरा आने के बजाय बूआजी आ खड़ी होती हैं।’ यही कारण है कि सारे प्रमुख पात्र पाठकों और दर्शकों की स्मृति में टिक जाते हैं।
सुप्रसिद्ध रंगकर्मी डॉ. प्रतिभा अग्रवाल द्वारा अनूदित यह प्रहसन नई साज-सज्जा में पाठकों व रंगकर्मियों को भाएगा, ऐसा विश्वास है। Is natak ki mukhya shakti iske chutile aur vyangya siddh sanvad hain. Katha ka vikas aur prvah sanvadon ke jariye hota rahta hai. Ek udahran, buaji ke vyaktitv ko vyanjit karta shashank namak patr ka ye kathan, ‘konngar se buaji ko prmila kaise khinchkar yahan la rahi hai, ye ya to bhagvan jane ya tum. . . Ye khabar sunne ke baad se mere to hosh phakhta ho rahe hain. Goli khakar marne ke samay aankhon ke samne andhera aane ke bajay buaji aa khadi hoti hain. ’ yahi karan hai ki sare prmukh patr pathkon aur darshkon ki smriti mein tik jate hain. Suprsiddh rangkarmi dau. Pratibha agrval dvara anudit ye prahsan nai saj-sajja mein pathkon va rangkarmiyon ko bhayega, aisa vishvas hai.