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Arya Evam Hadappa Sanskritiyon Ki Bhinnata

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यह पुस्तक आर्य एवं हड़प्पा सभ्यता का एक गहन अध्ययन है। इसमें प्रो. शर्मा ने आर्यों के मूल स्थान की खोज की कोशिश के साथ-साथ ज़्यादा ज़ोर इन सभ्यताओं के सांस्कृतिक पहलू पर दिया है। लेखक ने अपने अध्ययन के दौरान इस पुस्तक में आर्य एवं हड़प्पा संस्कृतियों की भिन्नता... Read More

Description

यह पुस्तक आर्य एवं हड़प्पा सभ्यता का एक गहन अध्ययन है। इसमें प्रो. शर्मा ने आर्यों के मूल स्थान की खोज की कोशिश के साथ-साथ ज़्यादा ज़ोर इन सभ्यताओं के सांस्कृतिक पहलू पर दिया है।
लेखक ने अपने अध्ययन के दौरान इस पुस्तक में आर्य एवं हड़प्पा संस्कृतियों की भिन्नता को दर्शाया है। लेखक का मानना है कि हड़प्पा सभ्यता नगरी है लेकिन वैदिक सभ्यता में नगर का कोई चिह्न नहीं है। कांस्य युग का हड़प्पा सभ्यता में प्रमाण मिलता है। हड़प्पा में लेखन-कला प्रचलित थी लेकिन वैदिक युग में लेखन-कला का कोई प्रमाण नहीं है।
अपनी सूक्ष्म विश्लेषण-दृष्टि और अकाट्य तर्कशक्ति के कारण यह कृति भी लेखक की पूर्व-प्रकाशित अन्य कृतियों की तरह पठनीय और संग्रहणीय होगी, ऐसा हमारा विश्वास है। Ye pustak aarya evan hadappa sabhyta ka ek gahan adhyyan hai. Ismen pro. Sharma ne aaryon ke mul sthan ki khoj ki koshish ke sath-sath jyada zor in sabhytaon ke sanskritik pahlu par diya hai. Lekhak ne apne adhyyan ke dauran is pustak mein aarya evan hadappa sanskritiyon ki bhinnta ko darshaya hai. Lekhak ka manna hai ki hadappa sabhyta nagri hai lekin vaidik sabhyta mein nagar ka koi chihn nahin hai. Kansya yug ka hadappa sabhyta mein prman milta hai. Hadappa mein lekhan-kala prachlit thi lekin vaidik yug mein lekhan-kala ka koi prman nahin hai.
Apni sukshm vishleshan-drishti aur akatya tarkshakti ke karan ye kriti bhi lekhak ki purv-prkashit anya kritiyon ki tarah pathniy aur sangrahniy hogi, aisa hamara vishvas hai.

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