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Andhere Band Kamare

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वर्तमान भारतीय समाज का अभिजात नागर मन दो हिस्सों में विभाजित है—एक में है पश्चिमी आधुनिकतावाद और दूसरे में वंशानुगत संस्कारवाद। इससे इस वर्ग के भीतर का द्वन्द्व पैदा होता है, उससे पूर्णता के बीच रिक्तता, स्वच्छन्दता के बीच अवरोध और प्रकाश के बीच अन्धकार आ खड़ा होता है। परिणामतः... Read More

Description

वर्तमान भारतीय समाज का अभिजात नागर मन दो हिस्सों में विभाजित है—एक में है पश्चिमी आधुनिकतावाद और दूसरे में वंशानुगत संस्कारवाद। इससे इस वर्ग के भीतर का द्वन्द्व पैदा होता है, उससे पूर्णता के बीच रिक्तता, स्वच्छन्दता के बीच अवरोध और प्रकाश के बीच अन्धकार आ खड़ा होता है। परिणामतः व्यक्ति ऊबने लगता है, भीतर ही भीतर क्रोध, ईर्ष्या और सन्देह जकड़ लेते हैं उसे, अपने ही लिए अजनबी हो उठता है वह, और तब इसे हम हरबंस की शक्ल में पहचानते हैं—हरबंस इस उपन्यास का केन्द्रीय पात्र, जो दाम्पत्य सम्बन्धों की सहज रागात्मकता, ऊष्मा और अर्थवत्ता की तलाश में भटक रहा है। हरबंस और नीलिमा के माध्यम से पारस्परिक ईमानदारी, भावनात्मक लगाव और मानसिक समदृष्टि से रिक्त दाम्पत्य जीवन का यहाँ प्रभावशाली चित्रण हुआ है। अपनी पहचान के लिए पहचानहीन होते जा रहे भारतीय अभिजातवर्ग की भौतिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक महत्त्वाकांक्षाओं के अँधेरे बन्द कमरों को खोलनेवाला यह उपन्यास हिन्दी की विशिष्टतम कथाकृतियों में गण्य है Vartman bhartiy samaj ka abhijat nagar man do hisson mein vibhajit hai—ek mein hai pashchimi aadhuniktavad aur dusre mein vanshanugat sanskarvad. Isse is varg ke bhitar ka dvandv paida hota hai, usse purnta ke bich riktta, svachchhandta ke bich avrodh aur prkash ke bich andhkar aa khada hota hai. Parinamatः vyakti uubne lagta hai, bhitar hi bhitar krodh, iirshya aur sandeh jakad lete hain use, apne hi liye ajanbi ho uthta hai vah, aur tab ise hum harbans ki shakl mein pahchante hain—harbans is upanyas ka kendriy patr, jo dampatya sambandhon ki sahaj ragatmakta, uushma aur arthvatta ki talash mein bhatak raha hai. Harbans aur nilima ke madhyam se parasprik iimandari, bhavnatmak lagav aur mansik samdrishti se rikt dampatya jivan ka yahan prbhavshali chitran hua hai. Apni pahchan ke liye pahchanhin hote ja rahe bhartiy abhijatvarg ki bhautik, bauddhik aur sanskritik mahattvakankshaon ke andhere band kamron ko kholnevala ye upanyas hindi ki vishishttam kathakritiyon mein ganya hai