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Andhavishwas Unmoolan : Vol. 3 : Siddhant

Rs. 175 Rs. 156

अंधविश्वास उन्मूलन और डॉ. नरेंद्र दाभोलकर एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। निरन्‍तर 25 वर्षों की मेहनत का फल है यह। अंधविश्वास उन्मूलन का कार्य महाराष्ट्र में विचार, उच्चार, आचार, संघर्ष, सिद्धान्‍त जैसे पंचसूत्र से होता आ रहा है। भारतवर्ष में ऐसा कार्य कम ही नज़र आता है। 'अंधविश्वास उन्मूलन : सिद्धांत'... Read More

Description

अंधविश्वास उन्मूलन और डॉ. नरेंद्र दाभोलकर एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। निरन्‍तर 25 वर्षों की मेहनत का फल है यह। अंधविश्वास उन्मूलन का कार्य महाराष्ट्र में विचार, उच्चार, आचार, संघर्ष, सिद्धान्‍त जैसे पंचसूत्र से होता आ रहा है। भारतवर्ष में ऐसा कार्य कम ही नज़र आता है।
'अंधविश्वास उन्मूलन : सिद्धांत' पुस्तक में गहन विचार-मंथन है। ईश्वर, धर्म, अध्यात्म, धर्मनिपेक्षता जैसे विषयों पर समाज-सुधारकों और विवेकवादी चिन्‍तकों ने समय-समय पर जो विचार व्यक्त किए, उनके मतभेदों को आन्‍दोलन के अनुभवों के आधार पर और व्यक्तिगत चिन्‍तन द्वारा परिभाषित किया गया है। ईश्वर के अस्तित्व पर विचार करते हुए लेखक का मुख्य उद्देश्य है कि—'व्यक्ति को विवेकशील बनाकर ही विवेकवादी समाज-निर्माण का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।'
अंधविश्वास के तिमिर से विवेक और विज्ञान के तेज की ओर ले जानेवाली यह पुस्तक परम्‍परा का तिमिर-भेद भी है और विज्ञान का लक्ष्य भी। Andhvishvas unmulan aur dau. Narendr dabholkar ek-dusre ke paryayvachi hain. Niran‍tar 25 varshon ki mehnat ka phal hai ye. Andhvishvas unmulan ka karya maharashtr mein vichar, uchchar, aachar, sangharsh, siddhan‍ta jaise panchsutr se hota aa raha hai. Bharatvarsh mein aisa karya kam hi nazar aata hai. Andhvishvas unmulan : siddhant pustak mein gahan vichar-manthan hai. Iishvar, dharm, adhyatm, dharmanipekshta jaise vishyon par samaj-sudharkon aur vivekvadi chin‍takon ne samay-samay par jo vichar vyakt kiye, unke matbhedon ko aan‍dolan ke anubhvon ke aadhar par aur vyaktigat chin‍tan dvara paribhashit kiya gaya hai. Iishvar ke astitv par vichar karte hue lekhak ka mukhya uddeshya hai ki—vyakti ko vivekshil banakar hi vivekvadi samaj-nirman ka lakshya hasil kiya ja sakta hai.
Andhvishvas ke timir se vivek aur vigyan ke tej ki or le janevali ye pustak param‍para ka timir-bhed bhi hai aur vigyan ka lakshya bhi.